LIC में सरकार की हिस्सेदारी बिक्री (OFS): विनिवेश, पूंजी बाजार और सार्वजनिक शेयरधारिता को समझने का महत्वपूर्ण विषय
भारत सरकार ने LIC में अपनी 6.5% तक की हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से ₹382 प्रति शेयर के आधार मूल्य पर बेचने का प्रस्ताव रखा है, जिससे शेयर कीमतों में अस्थायी गिरावट दर्ज की गई। OFS में कंपनी नए शेयर जारी नहीं करती, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचते हैं, इसलिए LIC की पूंजी संरचना और EPS पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इस कदम का उद्देश्य विनिवेश के माध्यम से राजस्व जुटाना, सार्वजनिक शेयरधारिता बढ़ाना और शेयर की तरलता में सुधार करना है। हालाँकि शेयरों में गिरावट आई, लेकिन LIC का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है और कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में लाभ, प्रीमियम आय तथा VNB में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।
भारत सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी 6.5% तक की हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (Offer for Sale–OFS) के माध्यम से बेचने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए ₹382 प्रति शेयर का आधार मूल्य निर्धारित किया गया है। इस घोषणा के बाद LIC के शेयर मूल्य में गिरावट देखी गई, क्योंकि निवेशकों ने कम मूल्य पर उपलब्ध शेयरों और बाजार में बढ़ने वाली आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए प्रतिक्रिया दी। यह कदम सरकार की विनिवेश (Disinvestment) नीति और सार्वजनिक शेयरधारिता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
ऑफर फॉर सेल (OFS) क्या है?
Offer for Sale (OFS) स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों के मौजूदा शेयरधारकों द्वारा अपनी हिस्सेदारी बेचने की एक व्यवस्था है। इसमें कंपनी कोई नए शेयर जारी नहीं करती, इसलिए कंपनी की शेयर पूंजी, बैलेंस शीट तथा प्रति शेयर आय (EPS) पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। LIC के मामले में विक्रेता भारत सरकार है, अतः बिक्री से प्राप्त राशि सरकार को प्राप्त होगी, न कि LIC को। OFS और IPO/FPO के बीच मुख्य अंतर यह है कि IPO/FPO में नए शेयर जारी हो सकते हैं, जबकि OFS केवल स्वामित्व संरचना में परिवर्तन करता है।
सरकार द्वारा LIC में हिस्सेदारी बेचने के उद्देश्य
इस समय सरकार के पास LIC में लगभग 96.5% हिस्सेदारी है, जबकि सार्वजनिक हिस्सेदारी लगभग 3.5% है। OFS के माध्यम से सरकार का उद्देश्य विनिवेश के जरिए राजस्व जुटाना, सार्वजनिक शेयरधारिता (Public Shareholding) को बढ़ाना तथा शेयर की तरलता (Liquidity) में सुधार करना है। यदि पूरी 6.5% हिस्सेदारी बिक जाती है, तो सार्वजनिक हिस्सेदारी लगभग 10% तक पहुंच सकती है, जिससे कंपनी सूचीबद्ध कंपनियों के सार्वजनिक शेयरधारिता मानकों के अधिक अनुरूप हो जाएगी।
OFS का शेयर मूल्य पर प्रभाव एवं निवेशकों की प्रतिक्रिया
OFS की घोषणा के बाद LIC के शेयरों में गिरावट का प्रमुख कारण बाजार की मांग एवं आपूर्ति (Demand-Supply Dynamics) रहा। जब निवेशकों को कम कीमत पर OFS के माध्यम से शेयर खरीदने का अवसर मिलता है, तो वे खुले बाजार में अधिक कीमत पर खरीदने से बचते हैं। साथ ही, बाजार में बड़ी संख्या में शेयर उपलब्ध होने की संभावना से आपूर्ति बढ़ती है, जिससे अल्पकाल में शेयर मूल्य पर दबाव बनता है। यह गिरावट कंपनी की वित्तीय स्थिति में कमजोरी का संकेत नहीं मानी जाती।
LIC का वित्तीय प्रदर्शन
हालिया वित्तीय परिणामों के अनुसार LIC का परिचालन प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में Value of New Business (VNB) में 41.6% की वृद्धि होकर यह ₹14,179 करोड़ तक पहुंच गया तथा VNB Margin बढ़कर 21.2% हो गया। कंपनी का कर पश्चात लाभ (PAT) ₹57,419 करोड़ रहा, जिसमें 19.3% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त, कुल प्रीमियम आय ₹5.36 लाख करोड़ तक पहुंच गई तथा अधिक लाभदायक Non-Participating Insurance Products की हिस्सेदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से महत्व
यह विषय UPSC प्रारंभिक परीक्षा में OFS, IPO, FPO, विनिवेश (Disinvestment), सार्वजनिक शेयरधारिता, EPS, VNB, पूंजी बाजार तथा LIC से संबंधित अवधारणाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्य परीक्षा (GS-III: भारतीय अर्थव्यवस्था) में इसे सरकारी विनिवेश नीति, सार्वजनिक उपक्रमों में सुधार, पूंजी बाजार, कॉरपोरेट गवर्नेंस, वित्तीय क्षेत्र सुधार तथा निवेशकों के संरक्षण के संदर्भ में जोड़ा जा सकता है। यह समाचार विनिवेश और पूंजी बाजार की कार्यप्रणाली को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण समकालीन उदाहरण है।
