भारत ने स्वदेशी समुद्री अनुसंधान क्षमता बढ़ाने के लिए ‘ORV सागर मंथन’ का अनावरण किया
9 सितंबर 2026 को कोलकाता में ₹840 करोड़ की लागत से निर्मित अत्याधुनिक Oceanographic Research Vessel (ORV) ‘सागर मंथन’ का अनावरण किया गया, जिसे GRSE ने NCPOR के लिए विकसित किया है। यह पोत जलवायु परिवर्तन, समुद्र विज्ञान, गहरे समुद्र के भूविज्ञान और समुद्री पारिस्थितिकी जैसे क्षेत्रों में बहुविषयक अनुसंधान करेगा तथा लगभग 30 वर्षों तक संचालन के लिए डिजाइन किया गया है। ‘सागर मंथन’ Deep Ocean Mission के तहत हिंद महासागर के Mid-Oceanic Ridge और समुद्री खनिज संसाधनों के सर्वेक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे प्राप्त महासागरीय एवं वायुमंडलीय डेटा जलवायु अध्ययन, सुनामी पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और भारत की Blue Economy को मजबूत करने में सहायक होगा।
9 सितंबर 2026 को कोलकाता में अत्याधुनिक Oceanographic Research Vessel (ORV) ‘सागर मंथन’ का अनावरण किया गया। इसे गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र (NCPOR) के लिए लगभग ₹840 करोड़ की अनुमानित लागत से विकसित किया है। यह परियोजना भारत की स्वदेशी समुद्री अनुसंधान क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
बहुविषयक समुद्री अनुसंधान का प्रमुख मंच
‘सागर मंथन’ को कठिन समुद्री परिस्थितियों में वर्षभर संचालन के लिए डिजाइन किया गया है। इसका उपयोग जलवायु परिवर्तन, समुद्र विज्ञान, गहरे समुद्र के भूविज्ञान, समुद्री पारिस्थितिकी और महासागरीय प्रक्रियाओं के अध्ययन में किया जाएगा। इसका अनुमानित परिचालन जीवनकाल लगभग 30 वर्ष है।
अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों से लैस
पोत में मल्टी-बीम बाथिमेट्री, मल्टी-चैनल सीस्मिक सिस्टम, सब-बॉटम प्रोफाइलिंग, मौसम रडार, ड्रॉप कील और CTD प्रोफाइलिंग जैसी आधुनिक प्रणालियां हैं। इसके अतिरिक्त यह Remotely Operated Vehicle (ROV) और Autonomous Underwater Vehicle (AUV) को तैनात करने में सक्षम है। इससे समुद्र की सतह से लेकर गहरे समुद्री तल तक वैज्ञानिक डेटा एकत्र किया जा सकेगा।
Deep Ocean Mission में महत्वपूर्ण भूमिका
‘सागर मंथन’ भारत के Deep Ocean Mission (DOM) के Deep Ocean Survey and Exploration घटक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह हिंद महासागर के Mid-Oceanic Ridge क्षेत्रों के सर्वेक्षण तथा Polymetallic Hydrothermal Sulphide Mineralisation के अध्ययन में सहायता करेगा। इससे भारत की समुद्री खनिज संसाधनों और गहरे समुद्र की वैज्ञानिक समझ मजबूत होगी।
जलवायु एवं आपदा प्रबंधन के लिए उपयोगी
पोत से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाले महासागरीय और वायुमंडलीय डेटा का उपयोग जलवायु परिवर्तन के अध्ययन, समुद्री पारिस्थितिकी, ध्रुवीय क्षेत्रों में बदलाव, सुनामी पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन में किया जा सकता है। इस प्रकार समुद्री अनुसंधान का प्रत्यक्ष संबंध भारत की जलवायु नीति और आपदा-रोधी क्षमता से भी है।
UPSC के लिए महत्व—समुद्री आत्मनिर्भरता और Blue Economy
यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत, Blue Economy, Deep Ocean Mission और स्वदेशी जहाज निर्माण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। GRSE द्वारा निर्मित पोत को Indian Register of Shipping (IRS) और American Bureau of Shipping (ABS) से दोहरी श्रेणी का प्रमाणन प्राप्त है। यह भारत की समुद्री वैज्ञानिक अवसंरचना और उन्नत जहाज निर्माण क्षमता में वृद्धि को दर्शाता है। UPSC अभ्यर्थियों को इसे Ocean Governance, Marine Resources, Climate Change, Disaster Management और Science & Technology से जोड़कर पढ़ना चाहिए।