PDS में CBDC आधारित डिजिटल फूड करेंसी — खाद्य सब्सिडी वितरण में डिजिटल परिवर्तन
केंद्र सरकार ने PMGKAY के तहत खाद्य सब्सिडी वितरण में CBDC आधारित DBT की पहल की है, जिसमें RBI द्वारा जारी Digital Rupee (e₹) के माध्यम से लाभार्थियों को प्रोग्रामेबल डिजिटल टोकन दिए जाते हैं। इस Purpose-Bound Subsidy का उपयोग केवल अधिकृत दुकानों/FPS से पात्र खाद्यान्न खरीदने के लिए किया जा सकता है, जिससे leakage, diversion और दुरुपयोग कम करने में मदद मिल सकती है। यह पहल PDS के डिजिटलीकरण, Aadhaar, e-POS, ONORC और JAM Trinity के साथ जुड़कर खाद्य सब्सिडी की traceability और पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास है। इसके संभावित लाभों के साथ digital divide, cyber security, privacy, connectivity और grievance redressal जैसी चुनौतियाँ भी हैं, इसलिए व्यापक विस्तार से पहले मजबूत डिजिटल अवसंरचना आवश्यक है।
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत खाद्य सब्सिडी के वितरण में Central Bank Digital Currency (CBDC) को DBT व्यवस्था से जोड़ने की पहल की है। इसमें भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी Digital Rupee (e₹) का उपयोग किया जाता है। लाभार्थी के CBDC Wallet में प्रोग्रामेबल डिजिटल टोकन जमा किए जाते हैं, जिन्हें निर्धारित खाद्यान्न खरीदने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका प्रमुख उद्देश्य सब्सिडी को त्वरित, पारदर्शी, ट्रेस करने योग्य और उद्देश्य-बद्ध बनाना है।
'Purpose-Bound Subsidy' क्यों महत्वपूर्ण है?
सामान्य DBT में राशि लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है और उसका उपयोग अपेक्षाकृत स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है। CBDC आधारित डिजिटल फूड करेंसी में programmability का उपयोग करके यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि सब्सिडी का उपयोग केवल पात्र खाद्यान्न खरीदने में हो। डिजिटल टोकन को अधिकृत व्यापारियों और Fair Price Shops (FPS) पर खाद्यान्न खरीद के लिए ही redeem किया जा सकता है। इससे खाद्य सब्सिडी के संभावित दुरुपयोग, leakage और diversion को कम करने में मदद मिल सकती है।
PDS सुधारों की अगली कड़ी के रूप में CBDC
भारत का Public Distribution System (PDS) पहले ही कई डिजिटल सुधारों से गुजर चुका है, जिनमें राशन कार्डों का डिजिटलीकरण, Aadhaar आधारित प्रमाणीकरण, e-POS मशीनें और One Nation One Ration Card (ONORC) शामिल हैं। CBDC इस प्रक्रिया में एक और तकनीकी परत जोड़ता है, जिसके माध्यम से लेन-देन का real-time digital record और traceability बेहतर हो सकती है। इससे सरकार को सब्सिडी के प्रवाह की निगरानी तथा भविष्य में data-driven और predictive analysis करने में सहायता मिल सकती है।
JAM Trinity और Digital Public Infrastructure से संबंध
यह पहल भारत के व्यापक Digital Public Infrastructure (DPI) और JAM Trinity—Jan Dhan, Aadhaar और Mobile के ढाँचे से जुड़ी है। इसका उद्देश्य सरकारी लाभों की अंतिम व्यक्ति तक डिजिटल माध्यम से पहुंच को मजबूत करना है। सरकार ने feature phone users को भी शामिल करने के लिए विशेष प्रावधानों का उल्लेख किया है, जिससे यह केवल smartphone आधारित व्यवस्था न रहकर व्यापक डिजिटल समावेशन की दिशा में आगे बढ़ सके।
संभावित लाभ और चुनौतियाँ
इस मॉडल से transparency, accountability, traceability और subsidy targeting में सुधार की संभावना है। डिजिटल भुगतान से नकदी पर निर्भरता कम हो सकती है तथा अधिकृत दुकानों पर लेन-देन का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। हालांकि, इसके साथ digital divide, नेटवर्क कनेक्टिविटी, cyber security, privacy, technological literacy और grievance redressal जैसी चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं। इसलिए बड़े पैमाने पर विस्तार से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि तकनीकी विफलता के कारण कोई पात्र लाभार्थी खाद्य सुरक्षा से वंचित न हो। संसदीय समिति ने भी nationwide scaling से पहले infrastructure, training, FPS integration और grievance redressal पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई है।
UPSC के लिए इसका व्यापक महत्व
यह विषय GS Paper-II और GS Paper-III दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। GS-II में इसे welfare delivery, DBT, food security, governance और digital inclusion से जोड़ा जा सकता है, जबकि GS-III में CBDC, digital economy, financial inclusion, technology और PDS reforms के संदर्भ में पूछा जा सकता है। व्यापक दृष्टि से यह पहल इस प्रश्न से जुड़ती है कि क्या technology welfare delivery में leakage कम करके राज्य की क्षमता बढ़ा सकती है, और साथ ही exclusion व privacy के जोखिमों को कैसे संतुलित किया जाए? यही इसका प्रमुख UPSC-level analytical dimension है।
