कर्नाटक कृषि अरण्य प्रोत्साहन योजना: कृषि वानिकी को बढ़ावा देकर हरित आवरण एवं किसानों की आय बढ़ाने की पहल
कर्नाटक सरकार की कृषि अरण्य प्रोत्साहन योजना का उद्देश्य किसानों को कृषि भूमि पर वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित कर हरित आवरण बढ़ाना और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाना है। योजना के तहत किसानों को सरकारी नर्सरियों से रियायती दर पर पौधे तथा तीन वर्षों तक पौधों के सफल संरक्षण के आधार पर वित्तीय सहायता दी जाती है। यह पहल कार्बन पृथक्करण, जैव विविधता संरक्षण, मृदा एवं जल संरक्षण तथा जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के साथ किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करती है। कृषि वानिकी आधारित यह योजना सतत विकास, हरित अर्थव्यवस्था और ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है।
कर्नाटक सरकार द्वारा संचालित कृषि अरण्य प्रोत्साहन योजना (Krishi Aranya Protsaha Yojana) का उद्देश्य किसानों को कृषि भूमि पर वृक्षारोपण (Agroforestry) के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के अंतर्गत वन विभाग किसानों को पौधरोपण, पौधों के संरक्षण तथा तीन वर्षों तक उनके सफल रखरखाव के आधार पर वित्तीय सहायता प्रदान करता है। इसका लक्ष्य राज्य में हरित आवरण बढ़ाना तथा कृषि को अधिक टिकाऊ बनाना है।
योजना के उद्देश्य (Objectives)
इस योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि भूमि पर वृक्षारोपण को बढ़ावा देकर वन एवं वृक्ष आवरण (Forest and Tree Cover) में वृद्धि करना है। साथ ही यह योजना जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) को बढ़ाने, जैव विविधता संरक्षण, मृदा एवं जल संरक्षण तथा किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने पर केंद्रित है।
योजना की प्रमुख विशेषताएँ (Key Features)
योजना के अंतर्गत किसान सरकारी नर्सरियों से रियायती दरों पर पौधे प्राप्त कर सकते हैं तथा लगाए गए पौधों के जीवित रहने के आधार पर तीन वर्षों तक चरणबद्ध प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। वन विभाग समय-समय पर निरीक्षण कर पौधों की स्थिति का मूल्यांकन करता है और उसी के आधार पर वित्तीय सहायता जारी की जाती है।
कृषि वानिकी (Agroforestry) का महत्व
कृषि वानिकी ऐसी भूमि उपयोग प्रणाली है जिसमें कृषि फसलों के साथ वृक्षों का वैज्ञानिक समावेश किया जाता है। इससे भूमि की उर्वरता बढ़ती है, जल संरक्षण में सुधार होता है, कार्बन अवशोषण बढ़ता है, जैव विविधता संरक्षित रहती है तथा किसानों को लकड़ी, फल, चारा, बीज एवं अन्य वन उत्पादों से अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। यह जलवायु-अनुकूल कृषि (Climate-Smart Agriculture) का महत्वपूर्ण घटक माना जाता है।
पर्यावरण एवं आर्थिक महत्व (Significance)
यह योजना सतत विकास (Sustainable Development), भूमि क्षरण की रोकथाम, हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy) तथा ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कृषि वानिकी के माध्यम से किसानों की आय के विविध स्रोत विकसित होते हैं तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ पर्यावरणीय संतुलन भी मजबूत होता है।
UPSC परीक्षा की दृष्टि से प्रमुख तथ्य (Key Takeaways)
कृषि अरण्य प्रोत्साहन योजना कर्नाटक सरकार एवं कर्नाटक वन विभाग की कृषि वानिकी आधारित पहल है।
योजना का उद्देश्य कृषि भूमि पर वृक्षारोपण बढ़ाकर वन एवं वृक्ष आवरण में वृद्धि करना है।
किसानों को पौधों के तीन वर्षों तक सफल संरक्षण के आधार पर प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
योजना कार्बन पृथक्करण, जैव विविधता संरक्षण, मृदा एवं जल संरक्षण तथा जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देती है।
कृषि वानिकी किसानों को लकड़ी, फल, चारा, बीज एवं अन्य वन उत्पादों से अतिरिक्त आय का अवसर प्रदान करती है।
यह योजना सतत कृषि, हरित विकास, ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण तथा जलवायु परिवर्तन अनुकूलन की दृष्टि से UPSC के लिए महत्वपूर्ण है।
