असम की ‘निजुत मोइना’ और ‘निजुत बाबू’ योजनाएँ—उच्च शिक्षा, लैंगिक समानता और बाल विवाह रोकथाम पर जोर
असम सरकार ने ‘मुख्यमंत्री निजुत मोइना’ और ‘निजुत बाबू’ योजनाओं के लिए 2026-27 की आवेदन प्रक्रिया शुरू की, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षा और शैक्षणिक निरंतरता को बढ़ावा देना है। निजुत मोइना योजना छात्राओं को वित्तीय सहायता देकर उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के साथ बाल विवाह रोकथाम और महिला सशक्तीकरण पर केंद्रित है। 2026 में योजना का विस्तार पॉलिटेक्निक छात्राओं और एकीकृत स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के सातवें सेमेस्टर के पात्र छात्रों तक किया गया है, जबकि निजुत बाबू योजना छात्रों को वित्तीय सहायता देती है। साथ ही, असम सरकार ने बाढ़ प्रभावित 793 स्कूलों के लिए ₹15.86 करोड़ और 21,025 छात्रों के लिए ₹4.26 करोड़ की सहायता घोषित की, जिससे शिक्षा की आपदा-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।
असम सरकार ने ‘मुख्यमंत्री निजुत मोइना’ और ‘निजुत बाबू’ योजनाओं के लिए 2026-27 की आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 6 अगस्त 2026 को गुवाहाटी में आवेदन पत्र वितरण की औपचारिक शुरुआत की। दोनों योजनाओं का व्यापक उद्देश्य उच्च माध्यमिक स्तर के बाद विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर उच्च शिक्षा तक पहुंच और शैक्षणिक निरंतरता को बढ़ावा देना है।
मुख्यमंत्री निजुत मोइना योजना—लड़कियों की शिक्षा पर विशेष फोकस:
निजुत मोइना योजना का प्रमुख उद्देश्य छात्राओं को आर्थिक सहायता देकर उन्हें उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना का एक महत्वपूर्ण सामाजिक उद्देश्य बाल विवाह की रोकथाम भी है। आर्थिक सहायता के माध्यम से सरकार छात्राओं को शिक्षा में बनाए रखना चाहती है, ताकि वे कम उम्र में विवाह के बजाय उच्च शिक्षा और कौशल विकास की दिशा में आगे बढ़ सकें। 2024-25 में लगभग 1.6 लाख छात्राएं इससे लाभान्वित हुईं, जबकि 2025-26 में लाभार्थियों की संख्या लगभग 4 लाख तक पहुंची।
2026 में योजना का दायरा बढ़ाया गया:
असम सरकार ने 2026 में निजुत मोइना योजना की पात्रता का विस्तार किया है। अब निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाली पॉलिटेक्निक पाठ्यक्रम की छात्राएं भी इसके दायरे में शामिल हैं। इसके अतिरिक्त एकीकृत स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के सातवें सेमेस्टर में अध्ययनरत पात्र छात्राओं को भी लाभ दिया जा रहा है। वित्तीय सहायता जारी रखने के लिए नियमित उपस्थिति, अनुशासन और पढ़ाई के प्रति प्रतिबद्धता जैसे मानदंड महत्वपूर्ण हैं।
निजुत बाबू योजना—छात्रों के लिए वित्तीय सहायता:
निजुत बाबू योजना उच्च माध्यमिक, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययनरत पात्र छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इसका उद्देश्य शिक्षा की लागत से परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करना और विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है। पिछले वर्ष लगभग 50,000 छात्र इस योजना से लाभान्वित हुए, जबकि चालू वर्ष में लगभग 70,000 अतिरिक्त छात्रों को शामिल करने का लक्ष्य है।
शिक्षा के साथ सामाजिक और आपदा-प्रबंधन आयाम:
इन योजनाओं का महत्व केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है। निजुत मोइना शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और बाल विवाह रोकथाम को एक साथ संबोधित करती है, जबकि निजुत बाबू शिक्षा में समान अवसर और मानव पूंजी निर्माण पर केंद्रित है। इसी अवसर पर असम सरकार ने बाढ़ प्रभावित शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों के 793 स्कूलों के लिए ₹15.86 करोड़ तथा शिवसागर और चराइदेव के 21,025 छात्रों के लिए ₹4.26 करोड़ की सहायता की घोषणा की। इससे शिक्षा व्यवस्था की आपदा-प्रतिरोधक क्षमता (Disaster Resilience) के महत्व को भी समझा जा सकता है।
UPSC के लिए व्यापक महत्व:
यह पहल SDG-4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा), SDG-5 (लैंगिक समानता), महिला सशक्तीकरण, मानव पूंजी निर्माण, सामाजिक न्याय और बाल विवाह उन्मूलन से जुड़ी है। UPSC में इसे इस दृष्टिकोण से समझना महत्वपूर्ण है कि केवल विद्यालयों में नामांकन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है; आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण के माध्यम से शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। निजुत मोइना जैसी लक्षित योजनाएँ यह दर्शाती हैं कि राज्य सरकारें शिक्षा नीति को सामाजिक सुधार के साधन के रूप में भी इस्तेमाल कर सकती हैं।
