दादरा एवं नगर हवेली एकीकरण दिवस: पुर्तगाली शासन से मुक्ति से भारतीय संघ में विलय तक
दादरा एवं नगर हवेली एकीकरण दिवस 11 अगस्त को मनाया जाता है, क्योंकि 11 अगस्त 1961 को यह क्षेत्र Dadra and Nagar Haveli Act, 1961 के तहत भारतीय संघ में शामिल हुआ। इससे पहले 2 अगस्त 1954 को स्थानीय लोगों और गोवा मुक्ति आंदोलन से जुड़े स्वयंसेवकों ने क्षेत्र को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराया था। 10वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1961 द्वारा दादरा एवं नगर हवेली को संविधान की प्रथम अनुसूची में केंद्रशासित प्रदेश के रूप में शामिल किया गया। 26 जनवरी 2020 को दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव का विलय कर वर्तमान केंद्रशासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव बनाया गया।
दादरा एवं नगर हवेली एकीकरण दिवस 11 अगस्त को उस ऐतिहासिक घटना की स्मृति में मनाया जाता है, जब 11 अगस्त 1961 को दादरा एवं नगर हवेली अधिनियम, 1961 के माध्यम से यह क्षेत्र औपचारिक रूप से भारतीय संघ में शामिल हुआ। इससे पहले 12 जून 1961 को वहां की वरिष्ठ पंचायत (Varishta Panchayat) ने सर्वसम्मति से भारतीय संघ के साथ एकीकरण का प्रस्ताव पारित किया था।
पुर्तगाली शासन से मुक्ति — 2 अगस्त 1954
दादरा एवं नगर हवेली पर पुर्तगाली शासन लगभग 170 वर्षों तक रहा। स्थानीय लोगों और गोवा मुक्ति आंदोलन से जुड़े स्वयंसेवकों के प्रयासों से 2 अगस्त 1954 को यह क्षेत्र पुर्तगाली शासन से मुक्त हुआ। इसके बाद यहां एक स्वतंत्र प्रशासन स्थापित किया गया, जिसे स्थानीय पंचायतों के माध्यम से संचालित किया गया। यह घटना भारत के औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति और राष्ट्रीय एकीकरण के व्यापक इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
1961 में भारतीय संघ के साथ औपचारिक एकीकरण
मुक्ति के बाद कुछ वर्षों तक दादरा एवं नगर हवेली एक स्वतंत्र प्रशासनिक व्यवस्था के तहत रहा। 1961 में स्थानीय प्रतिनिधि संस्था ने भारत में विलय का निर्णय लिया। इसके बाद संसद ने Dadra and Nagar Haveli Act, 1961 पारित किया, जिसे 11 अगस्त 1961 से प्रभावी माना गया। इस अधिनियम ने क्षेत्र के प्रशासन तथा संसद में उसके प्रतिनिधित्व के लिए कानूनी व्यवस्था स्थापित की।
संविधान और 10वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1961
दादरा एवं नगर हवेली के भारतीय संघ में औपचारिक समावेशन के संदर्भ में 10वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1961 अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से संविधान की प्रथम अनुसूची में दादरा एवं नगर हवेली को केंद्रशासित प्रदेश के रूप में शामिल किया गया और संबंधित संवैधानिक प्रावधानों में आवश्यक परिवर्तन किए गए। UPSC के लिए यह घटना संविधान में नए क्षेत्रों के समावेशन और भारत के क्षेत्रीय एकीकरण से जुड़ा महत्वपूर्ण तथ्य है।
वर्तमान प्रशासनिक स्थिति
दादरा एवं नगर हवेली लंबे समय तक एक अलग केंद्रशासित प्रदेश रहा। बाद में 26 जनवरी 2020 को दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव को मिलाकर नया केंद्रशासित प्रदेश “दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव” बनाया गया। वर्तमान में दादरा एवं नगर हवेली इस केंद्रशासित प्रदेश का एक जिला है।
UPSC के लिए महत्व: राष्ट्रीय एकीकरण और संवैधानिक विकास
दादरा एवं नगर हवेली का इतिहास UPSC के लिए GS Paper-I में औपनिवेशिक इतिहास एवं स्वतंत्रता के बाद भारत का एकीकरण तथा GS Paper-II में संविधान, केंद्रशासित प्रदेश और संघीय व्यवस्था से जुड़ा है। यह उदाहरण दिखाता है कि स्वतंत्रता के बाद भारत का राजनीतिक एकीकरण केवल रियासतों के विलय तक सीमित नहीं था, बल्कि पुर्तगाली और फ्रांसीसी नियंत्रण वाले क्षेत्रों का भारत में समावेशन भी इसका हिस्सा था। इसे राष्ट्रीय एकता, संप्रभुता, क्षेत्रीय पुनर्गठन और संवैधानिक एकीकरण के संदर्भ में पढ़ना चाहिए।
