डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला बने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के नए सचिव
डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला प्रसिद्ध समुद्र विज्ञानी एवं वैज्ञानिक-प्रशासक हैं, जिन्हें Remote Sensing, Satellite Oceanography और Disaster Risk Reduction में तीन दशकों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने UNESCO-IOC के Indian Ocean Tsunami Warning and Mitigation System में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई और 2004 सुनामी के बाद भारत की Tsunami Early Warning System को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अगस्त 2020 से INCOIS के निदेशक के रूप में उन्होंने PFZ Advisories, Coral Reef Bleaching Alert System और Multi-Hazard Vulnerability Mapping जैसी सेवाओं को बढ़ावा दिया। उन्हें 2008 में Indian National Geospatial Award और 2010 में National Geosciences Award मिला तथा उनके 70 से अधिक वैज्ञानिक शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।
डॉ. तुम्माला एक प्रसिद्ध समुद्र विज्ञानी एवं वैज्ञानिक-प्रशासक हैं, जिनके पास तीन दशकों से अधिक का अनुभव है। उनकी विशेषज्ञता में Remote Sensing, Satellite Oceanography, Geospatial Technology, Coastal Hazard Mitigation, Disaster Risk Reduction और Marine Science प्रमुख हैं। उन्होंने INCOIS सहित कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में वैज्ञानिक नेतृत्व की भूमिका निभाई है।
UNESCO-IOC और हिंद महासागर सुनामी चेतावनी प्रणाली
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव बनने से पहले वे UNESCO-Intergovernmental Oceanographic Commission (IOC) के अंतर्गत Indian Ocean Tsunami Warning and Mitigation System (IOTWMS) Secretariat के प्रमुख के रूप में कार्यरत थे। इस प्रणाली का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में सुनामी की निगरानी, चेतावनी और आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मजबूत करना है।
भारत की सुनामी पूर्व चेतावनी प्रणाली में योगदान
2004 की हिंद महासागर सुनामी के बाद भारत ने अपनी सुनामी पूर्व चेतावनी क्षमता को मजबूत किया। डॉ. तुम्माला ने INCOIS में Indian Tsunami Early Warning Centre (ITEWC) की स्थापना और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस प्रणाली ने भारत की समुद्री आपदा-प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को भी बढ़ाया।
INCOIS के निदेशक के रूप में भूमिका
डॉ. तुम्माला अगस्त 2020 से ESSO-INCOIS, हैदराबाद के निदेशक रहे। उनके नेतृत्व में Potential Fishing Zone (PFZ) Advisories, Coral Reef Bleaching Alert System, Multi-Hazard Vulnerability Mapping तथा Ocean Observation and Information Services जैसी सेवाओं को आगे बढ़ाया गया। ये सेवाएँ मछुआरों, तटीय समुदायों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और नीति-निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पुरस्कार एवं वैज्ञानिक उपलब्धियाँ
डॉ. तुम्माला को पृथ्वी विज्ञान और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्हें 2010 में National Geosciences Award तथा 2008 में Indian National Geospatial Award प्रदान किया गया। उनका शोध क्षेत्र Remote Sensing, Satellite Oceanography और Disaster Risk Reduction से जुड़ा है तथा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय peer-reviewed journals में 70 से अधिक वैज्ञानिक प्रकाशन किए हैं।
UPSC के लिए इसका महत्व
यह नियुक्ति Ocean Governance, Blue Economy, Climate Change, Disaster Management और Early Warning Systems जैसे UPSC के महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ी है। भारत Deep Ocean Mission, समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग, जलवायु मॉडलिंग तथा Multi-Hazard Early Warning Systems को मजबूत कर रहा है। इसलिए इस समाचार को GS Paper-III (Science & Technology, Environment, Disaster Management) तथा Essay में उदाहरण के रूप में उपयोग किया जा सकता है। विशेष रूप से 2004 सुनामी के बाद भारत की आपदा-पूर्व चेतावनी क्षमता का विकास “आपदा प्रतिक्रिया से आपदा जोखिम न्यूनीकरण” की दिशा में भारत के परिवर्तन को दर्शाता है।
