राम नाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन: लोकतंत्र, सामाजिक समरसता और सार्वजनिक सेवा का दस्तावेज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 अगस्त 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की आत्मकथा “भारतीय गणराज्य की विजय: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष” का विमोचन किया। पुस्तक में कोविंद के प्रारंभिक संघर्ष, शिक्षा, सार्वजनिक सेवा, राजनीतिक यात्रा और भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में उनके अनुभवों का वर्णन है। कोविंद का जीवन शिक्षा, सामाजिक समरसता, समान अवसर और लोकतांत्रिक व्यवस्था में सामाजिक गतिशीलता का उदाहरण प्रस्तुत करता है। राष्ट्रपति पद के बाद उन्होंने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ उच्च-स्तरीय समिति की अध्यक्षता की, जिससे यह विषय संविधान, चुनाव सुधार और संघवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण बनता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की आत्मकथा “भारतीय गणराज्य की विजय: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष” का विमोचन किया। पुस्तक में कोविंद के प्रारंभिक जीवन, सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों, सार्वजनिक सेवा, राजनीतिक यात्रा और भारत के राष्ट्रपति के रूप में उनके अनुभवों को प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक व्यक्तिगत जीवन की कहानी के साथ-साथ भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में अवसर और सामाजिक गतिशीलता को समझने का माध्यम भी है।
संघर्ष से संवैधानिक पद तक की यात्रा
राम नाथ कोविंद का जीवन इस बात का उदाहरण है कि शिक्षा, परिश्रम और सार्वजनिक सेवा के माध्यम से सामाजिक एवं आर्थिक सीमाओं को पार किया जा सकता है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के परौंख गांव में हुआ था। उन्होंने कानून की शिक्षा प्राप्त की और सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया। वे राज्यसभा के सदस्य रहे, बिहार के राज्यपाल के रूप में कार्य किया और बाद में भारत के 14वें राष्ट्रपति बने। UPSC के लिए यह यात्रा भारतीय लोकतंत्र में सामाजिक गतिशीलता और संवैधानिक संस्थाओं तक पहुंच के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
प्रारंभिक जीवन और सामाजिक समरसता का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने कोविंद के बचपन की कठिन परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके जीवन में परिवार, शिक्षा और समाज के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बचपन में घर में आग लगने की घटना में उनकी माता की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद पड़ोस की एक महिला ने उनके पालन-पोषण में सहायता की। इस प्रसंग को सामाजिक सहयोग, मानवीय संवेदना और सामाजिक समरसता के उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। यह पहलू UPSC के Essay और GS Paper-I में समावेशी समाज से संबंधित प्रश्नों के लिए उपयोगी है।
शिक्षा और सार्वजनिक सेवा का महत्व
कोविंद के जीवन में शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन के साधन के रूप में विशेष महत्व मिला। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और कानून के क्षेत्र में आगे बढ़े। उनका जीवन इस दृष्टिकोण को मजबूत करता है कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक सशक्तीकरण, समान अवसर और लोकतांत्रिक भागीदारी का महत्वपूर्ण आधार है। UPSC के लिए इसे शिक्षा, सामाजिक न्याय और अवसर की समानता से जोड़ा जा सकता है।
राष्ट्रपति के रूप में भूमिका और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’
राम नाथ कोविंद ने भारत के राष्ट्रपति के रूप में 25 जुलाई 2017 से 25 जुलाई 2022 तक कार्य किया। राष्ट्रपति पद के बाद उन्हें ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के विषय पर गठित उच्च-स्तरीय समिति का अध्यक्ष बनाया गया। समिति ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने की व्यवहार्यता तथा उससे जुड़े संवैधानिक, कानूनी और प्रशासनिक मुद्दों का अध्ययन किया।
UPSC के लिए व्यापक महत्व
यह घटना केवल एक पुस्तक विमोचन नहीं बल्कि भारतीय गणराज्य में लोकतांत्रिक अवसर, सामाजिक समरसता, शिक्षा और सार्वजनिक सेवा के महत्व को समझने का अवसर प्रदान करती है। इसे GS Paper-II में राष्ट्रपति पद, संवैधानिक संस्थाएं, लोकतंत्र और चुनाव सुधार, GS Paper-I में सामाजिक समरसता एवं सामाजिक परिवर्तन, तथा Essay में “शिक्षा और लोकतंत्र”, “सार्वजनिक सेवा और राष्ट्र निर्माण” जैसे विषयों से जोड़ा जा सकता है। कोविंद की यात्रा यह भी दर्शाती है कि संवैधानिक लोकतंत्र में संस्थागत अवसर व्यक्तिगत सामाजिक पृष्ठभूमि से आगे बढ़ने का माध्यम बन सकते हैं।
