जीआरएसई ने ‘श्रुति’ एनजीओपीवी का शुभारंभ किया: भारत की समुद्री सुरक्षा और स्वदेशी जहाज निर्माण को बढ़ावा
GRSE ने 11 अगस्त 2026 को कोलकाता शिपयार्ड में भारतीय नौसेना के लिए दूसरे Next Generation Offshore Patrol Vessel (NGOPV) ‘श्रुति’ का शुभारंभ किया, जिसे यार्ड 3037 नाम दिया गया है। भारतीय नौसेना के लिए कुल 11 NGOPV बनाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य समुद्री निगरानी, गश्त और Maritime Domain Awareness (MDA) को मजबूत करना है। ‘श्रुति’ के पहले ‘संघमित्रा’ को 20 मई 2026 को लॉन्च किया गया था, जबकि GRSE इस परियोजना के तहत कुल चार NGOPV का निर्माण कर रहा है। यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, समुद्री सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने 11 अगस्त 2026 को कोलकाता स्थित अपने शिपयार्ड में भारतीय नौसेना के लिए निर्मित किए जा रहे दूसरे Next Generation Offshore Patrol Vessel (NGOPV) का शुभारंभ किया। इस पोत को यार्ड 3037 नाम दिया गया है और इसका नाम ‘श्रुति’ रखा गया है। यह परियोजना भारत की समुद्री निगरानी और स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
NGOPV कार्यक्रम और भारतीय नौसेना की आवश्यकता
Next Generation Offshore Patrol Vessels का उद्देश्य भारतीय समुद्री क्षेत्र में निगरानी, गश्त और समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाना है। भारतीय नौसेना के लिए कुल 11 NGOPV का निर्माण किया जा रहा है। इन पोतों का उपयोग भारत के विशाल समुद्री क्षेत्र की निगरानी, समुद्री कानूनों के प्रवर्तन में सहायता तथा विभिन्न समुद्री सुरक्षा अभियानों के लिए किया जा सकता है। यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की Maritime Domain Awareness (MDA) को मजबूत करने में भी सहायक होगा।
GRSE द्वारा निर्मित दूसरा NGOPV
‘श्रुति’ इस परियोजना के तहत GRSE द्वारा निर्मित दूसरा NGOPV है। इससे पहले ‘संघमित्रा’ नामक पहला NGOPV 20 मई 2026 को लॉन्च किया गया था। GRSE इस 11-पोत कार्यक्रम में चार NGOPV का निर्माण कर रहा है। शेष पोतों के निर्माण में Goa Shipyard Limited (GSL) सहित अन्य भारतीय शिपयार्डों की भूमिका है। यह भारत में रक्षा उत्पादन क्षमता के विस्तार और विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्डों के बीच औद्योगिक सहयोग को दर्शाता है।
GRSE की रणनीतिक भूमिका
Garden Reach Shipbuilders and Engineers (GRSE) का मुख्यालय कोलकाता में है और यह भारत के प्रमुख रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के जहाज निर्माताओं में से एक है। GRSE ने भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के लिए विभिन्न प्रकार के युद्धपोतों और सहायक पोतों का निर्माण किया है। स्वदेशी युद्धपोत निर्माण से भारत को आयात पर निर्भरता कम करने, घरेलू रक्षा उद्योग विकसित करने और तकनीकी क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलती है।
समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत से संबंध
भारत की लगभग 7,500 किमी लंबी तटरेखा और हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी रणनीतिक स्थिति के कारण समुद्री सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। NGOPV जैसे पोत तटीय निगरानी, समुद्री गश्त, अवैध गतिविधियों की रोकथाम, समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया जैसी गतिविधियों में उपयोगी हो सकते हैं। स्वदेशी निर्माण भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘Make in India’ अभियानों के अनुरूप है तथा इससे घरेलू रक्षा विनिर्माण, रोजगार और तकनीकी कौशल को बढ़ावा मिलता है।
UPSC के लिए व्यापक महत्व
यह समाचार GS Paper-III में रक्षा प्रौद्योगिकी, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इसे हिंद महासागर क्षेत्र (IOR), Maritime Domain Awareness, Blue Economy, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत से जोड़ा जा सकता है। भारत के लिए समुद्री सुरक्षा का महत्व इसलिए भी बढ़ता है क्योंकि देश का अधिकांश विदेशी व्यापार समुद्री मार्गों से होता है। ऐसे में आधुनिक गश्ती पोतों की क्षमता बढ़ाना भारत की सागर (Security and Growth for All in the Region) दृष्टि और व्यापक समुद्री रणनीति के अनुरूप है।
