भारत का दुग्ध उत्पादन: उत्तर प्रदेश देश में शीर्ष पर, राजस्थान दूसरे स्थान पर
भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और वैश्विक दूध उत्पादन में लगभग 25% योगदान देता है, जिससे डेयरी क्षेत्र ग्रामीण आय, रोजगार और पोषण सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। BAHS 2025 के अनुसार, 2024-25 में उत्तर प्रदेश 15.66% हिस्सेदारी के साथ भारत का सबसे बड़ा दूध उत्पादक राज्य रहा, इसके बाद राजस्थान और मध्य प्रदेश का स्थान है। उत्तर प्रदेश में दूध उत्पादन 2016-17 के 27.7 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में लगभग 38.8 मिलियन टन हो गया, जिसमें पशुधन, चारा और डेयरी अवसंरचना की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डेयरी क्षेत्र छोटे किसानों की आय में विविधता, महिला आर्थिक भागीदारी, ग्रामीण रोजगार और पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने के साथ कृषि एवं संबद्ध अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है।
भारत वैश्विक स्तर पर दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश बना हुआ है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुसार, भारत वैश्विक दूध उत्पादन में लगभग 25% योगदान देता है। भारत में डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों की आय, रोजगार और पोषण सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों तथा भूमिहीन ग्रामीण परिवारों के लिए पशुपालन नियमित आय का महत्वपूर्ण स्रोत है।
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा दूध उत्पादक राज्य
Basic Animal Husbandry Statistics (BAHS) 2025 के अनुसार, वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश भारत के कुल दूध उत्पादन में 15.66% हिस्सेदारी के साथ देश का सबसे बड़ा दूध उत्पादक राज्य रहा। इसके बाद राजस्थान 14.82%, मध्य प्रदेश 9.12%, गुजरात 7.78% और महाराष्ट्र 6.71% के साथ प्रमुख दूध उत्पादक राज्यों में शामिल रहे। इन पांच राज्यों का संयुक्त योगदान देश के कुल दूध उत्पादन का 54.09% रहा।
उत्तर प्रदेश के दुग्ध क्षेत्र में वृद्धि
उत्तर प्रदेश में पिछले वर्षों में दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य में दूध उत्पादन 2016-17 में लगभग 27.7 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में लगभग 38.8 मिलियन टन हो गया। यह वृद्धि राज्य में पशुधन आधार, डेयरी गतिविधियों, दुग्ध संग्रहण नेटवर्क और प्रसंस्करण सुविधाओं के विस्तार को दर्शाती है। ग्रामीण परिवारों के लिए डेयरी आय का अपेक्षाकृत नियमित स्रोत उपलब्ध कराती है।
उत्तर प्रदेश की अग्रणी स्थिति के प्रमुख कारण
उत्तर प्रदेश में बड़ी पशुधन आबादी, विशाल ग्रामीण क्षेत्र और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था डेयरी विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां प्रदान करती है। कृषि अवशेष और चारे की उपलब्धता पशुपालन को समर्थन देती है। इसके अतिरिक्त, दुग्ध सहकारी समितियों, संगठित दूध संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन अवसंरचना के विस्तार ने राज्य के डेयरी क्षेत्र को मजबूत किया है। कृषि और पशुपालन का यह एकीकरण ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विविध आय स्रोत उपलब्ध कराता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था में डेयरी क्षेत्र का महत्व
डेयरी क्षेत्र भारत के कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दूध ग्रामीण रोजगार, किसानों की आय और प्रोटीन एवं कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों की उपलब्धता में योगदान देता है। डेयरी क्षेत्र की विशेषता यह है कि इसमें छोटे स्तर के उत्पादक भी बाजार से जुड़ सकते हैं। इससे कृषि आय में विविधीकरण, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सकता है। इसलिए डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण विकास और पोषण सुरक्षा दोनों से जोड़ा जा सकता है।
UPSC के लिए व्यापक महत्व
यह समाचार GS Paper-III में कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों, पशुपालन, किसानों की आय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य-पोषण सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इसे White Revolution, Operation Flood, सहकारी डेयरी मॉडल, पशुधन उत्पादकता, नस्ल सुधार, चारा प्रबंधन, डेयरी प्रसंस्करण और कृषि विविधीकरण से जोड़ा जा सकता है। साथ ही, जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में पशुधन क्षेत्र से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, जल उपयोग और टिकाऊ डेयरी उत्पादन जैसे मुद्दे भी UPSC के लिए महत्वपूर्ण हैं।
