महाराष्ट्र ने सर्पदंश को अधिसूचित रोग घोषित किया: सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी और त्वरित उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
महाराष्ट्र सरकार ने 18 अगस्त 2026 से सर्पदंश को अधिसूचित रोग घोषित कर संदिग्ध एवं पुष्ट मामलों तथा मौतों की रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी है। अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को सर्पदंश मामलों की जानकारी HMIS और IDSP जैसी प्रणालियों के माध्यम से संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को देनी होगी। राज्य और जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की बहुस्तरीय व्यवस्था बनाई गई है तथा सर्पदंश के बाद पहले 60 मिनट के ‘गोल्डन ऑवर’ में त्वरित उपचार पर जोर दिया गया है। इस व्यवस्था से सर्पदंश के वास्तविक आंकड़े प्राप्त होंगे और विशेषकर दूरदराज व आदिवासी क्षेत्रों में एंटी-स्नेक वेनम (ASV) की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
महाराष्ट्र सरकार ने 18 अगस्त 2026 से सर्पदंश (Snakebite) को अधिसूचित रोग घोषित किया है। इसके तहत संदिग्ध एवं पुष्ट सर्पदंश मामलों तथा इससे होने वाली मृत्यु की सूचना संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को देना अनिवार्य होगा। इससे राज्य में सर्पदंश की वास्तविक स्थिति और मृत्यु दर का बेहतर आकलन संभव होगा।
अनिवार्य रिपोर्टिंग व्यवस्था:
अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को सर्पदंश के मामलों की रिपोर्ट जिला स्वास्थ्य अधिकारी या जिला सर्जन को देनी होगी। गंभीर और जानलेवा मामलों की तत्काल सूचना उपलब्ध संचार माध्यमों से देना आवश्यक होगा। रिपोर्टिंग के लिए Health Management Information System (HMIS) और Integrated Disease Surveillance Programme (IDSP) जैसी प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा।
राज्य एवं जिला स्तर पर नोडल तंत्र:
राज्य स्तर पर निदेशक (अस्पताल) इस व्यवस्था के लिए जिम्मेदार होंगे। जिला स्तर पर जिला सर्जन और जिला स्वास्थ्य अधिकारी नोडल अधिकारी की भूमिका निभाएंगे, जबकि नगर निगम क्षेत्रों में चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी या अतिरिक्त चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी जिम्मेदार होंगे। यह बहुस्तरीय तंत्र बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई में सहायता करेगा।
‘गोल्डन ऑवर’ और समय पर उपचार:
सर्पदंश के मामलों में उपचार के लिए शुरुआती समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। महाराष्ट्र सरकार ने सर्पदंश के बाद पहले 60 मिनट के ‘गोल्डन ऑवर’ में त्वरित चिकित्सा सहायता के महत्व पर जोर दिया है। समय पर उपचार से मृत्यु और गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।
एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता में सहायता:
अनिवार्य रिपोर्टिंग से विभिन्न जिलों और क्षेत्रों में सर्पदंश के मामलों का वास्तविक डेटा उपलब्ध होगा। इसके आधार पर सरकार आवश्यक स्थानों पर Anti-Snake Venom (ASV) की उपलब्धता, भंडारण और आपूर्ति की बेहतर योजना बना सकेगी। इससे विशेष रूप से दूरदराज, वनवासी और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
UPSC परीक्षा के लिए महत्त्व:
यह समाचार GS Paper-II में सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी नीतियों के संदर्भ में तथा GS Paper-III में स्वास्थ्य अवसंरचना और आपदा/जोखिम प्रबंधन के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। यह निर्णय रोग निगरानी (Disease Surveillance), डेटा-आधारित स्वास्थ्य नीति, ग्रामीण एवं आदिवासी स्वास्थ्य और समयबद्ध आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था के बीच संबंध को दर्शाता है।
