विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस: बुजुर्गों के सम्मान, सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन पर वैश्विक जोर
विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस प्रत्येक वर्ष 21 अगस्त को वरिष्ठ नागरिकों के योगदान का सम्मान करने तथा उनके अधिकारों, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। बढ़ती जीवन प्रत्याशा के कारण विश्व में वृद्धजन आबादी बढ़ रही है, जिससे स्वास्थ्य देखभाल, पेंशन और दीर्घकालिक देखभाल की आवश्यकता भी बढ़ रही है। भारत में वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक निर्भरता, स्वास्थ्य समस्याओं, सामाजिक अलगाव और देखभाल की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 41 वृद्धावस्था में सार्वजनिक सहायता की व्यवस्था से संबंधित है, जिससे वरिष्ठ नागरिक कल्याण सामाजिक न्याय और कल्याणकारी राज्य की अवधारणा से जुड़ता है।
विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस (World Senior Citizens Day) प्रत्येक वर्ष 21 अगस्त को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के योगदान को सम्मान देना तथा उनके अधिकारों, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
वैश्विक पृष्ठभूमि:
इस दिवस को मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और उनके अधिकारों के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई। वर्ष 1990 में 21 अगस्त को विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस के रूप में मान्यता दी गई।
वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती जनसंख्या:
स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और जीवन प्रत्याशा बढ़ने के कारण विश्व में वृद्ध जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही स्वास्थ्य देखभाल, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा, दीर्घकालिक देखभाल और आर्थिक सहायता जैसी नीतियों की आवश्यकता भी बढ़ती जा रही है।
भारत में वरिष्ठ नागरिकों की स्थिति:
भारत में वृद्धजन कल्याण एक महत्वपूर्ण सामाजिक न्याय का विषय है। वरिष्ठ नागरिकों के सामने आर्थिक निर्भरता, स्वास्थ्य समस्याएं, सामाजिक अलगाव और देखभाल की कमी जैसी चुनौतियां हो सकती हैं। सरकार द्वारा पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
संवैधानिक और सामाजिक न्याय का दृष्टिकोण:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 41 में राज्य को अपनी आर्थिक क्षमता और विकास की सीमाओं के भीतर वृद्धावस्था सहित अन्य परिस्थितियों में सार्वजनिक सहायता प्रदान करने का प्रयास करने का निर्देश दिया गया है। इसलिए वरिष्ठ नागरिकों का कल्याण कल्याणकारी राज्य और सामाजिक न्याय की अवधारणा से जुड़ा हुआ है।
UPSC परीक्षा के लिए महत्त्व:
यह दिवस GS Paper-I में जनसंख्या एवं सामाजिक मुद्दों तथा GS Paper-II में सामाजिक न्याय, कमजोर वर्गों और कल्याणकारी नीतियों के लिए महत्वपूर्ण है। उत्तर लेखन में इसे Ageing Population, Social Security, Healthy Ageing और Inclusive Development के संदर्भ में उपयोग किया जा सकता है।
