रॉस द्वीप से नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप: अंडमान-निकोबार में औपनिवेशिक नामों के परिवर्तन का ऐतिहासिक महत्व
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित ऐतिहासिक रॉस द्वीप का नाम दिसंबर 2018 में बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप कर दिया गया। 30 दिसंबर 1943 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने पोर्ट ब्लेयर में भारतीय ध्वज फहराया था, जिससे इस द्वीप का स्वतंत्रता संग्राम से विशेष संबंध है। ब्रिटिश शासन के दौरान यह द्वीप अंडमान में ब्रिटिश प्रशासन का प्रमुख केंद्र था और आज भी यहां औपनिवेशिक इमारतों के अवशेष मौजूद हैं। इसी नामकरण अभियान के तहत हैवलॉक द्वीप का नाम स्वराज द्वीप और नील द्वीप का नाम शहीद द्वीप रखा गया।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित ऐतिहासिक रॉस द्वीप का नाम दिसंबर 2018 में बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप कर दिया गया। यह नामकरण भारत के स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के योगदान के सम्मान में किया गया।
नाम परिवर्तन का ऐतिहासिक आधार
नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अंडमान-निकोबार के इतिहास से विशेष संबंध रहा है। 30 दिसंबर 1943 को नेताजी ने पोर्ट ब्लेयर में भारतीय ध्वज फहराया था, जो भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और आजाद हिंद सरकार के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी।
भौगोलिक स्थिति
नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दक्षिण अंडमान क्षेत्र में स्थित है। यह श्री विजयपुरम के निकट स्थित है, जिसका पूर्व नाम पोर्ट ब्लेयर था। यह द्वीप समुद्री मार्ग से पहुँचा जा सकता है।
ब्रिटिश शासन के दौरान महत्व
ब्रिटिश शासन के समय रॉस द्वीप अंडमान क्षेत्र में ब्रिटिश प्रशासन का प्रमुख केंद्र था। यहां प्रशासनिक भवनों, अधिकारियों के आवासों और अन्य औपनिवेशिक संरचनाओं का निर्माण किया गया था। आज भी इन इमारतों के अवशेष औपनिवेशिक इतिहास की महत्वपूर्ण धरोहर हैं।
अंडमान-निकोबार के अन्य प्रमुख नाम परिवर्तन
दिसंबर 2018 में औपनिवेशिक नामों को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ने के उद्देश्य से अन्य प्रमुख द्वीपों के नाम भी बदले गए—
रॉस द्वीप → नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप
हैवलॉक द्वीप → स्वराज द्वीप
नील द्वीप → शहीद द्वीप
UPSC परीक्षा के लिए महत्व
यह विषय UPSC के लिए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, आजाद हिंद सरकार, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और औपनिवेशिक विरासत के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। प्रश्नों में विशेष रूप से 30 दिसंबर 1943, नेताजी द्वारा ध्वजारोहण तथा अंडमान-निकोबार के बदले गए नाम पूछे जा सकते हैं।
