जापान का एग्रीवोल्टेइक प्रयोग: एक ही खेत से खाद्य और सौर ऊर्जा उत्पादन का नया मॉडल
जापान में टोक्यो विश्वविद्यालय के छह वर्षीय अध्ययन में एक ही भूमि पर चावल की खेती और सौर ऊर्जा उत्पादन को एकीकृत करने वाली एग्रीवोल्टेइक प्रणाली का परीक्षण किया गया। सौर पैनलों की छाया के कारण चावल की उपज लगभग 23% कम हुई, लेकिन इससे खेत के सूक्ष्म जलवायु और चावल की गुणवत्ता में भी परिवर्तन देखा गया। चावल और सौर बिजली के संयुक्त आर्थिक मूल्य के आधार पर इस प्रणाली ने केवल चावल आधारित खेती की तुलना में लगभग 14 गुना अधिक सकल लाभ उत्पन्न किया। यह मॉडल “Food + Energy” के माध्यम से भूमि के बहुउद्देशीय उपयोग, किसानों की आय के विविधीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
टोक्यो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 2018 से 2023 तक जापान के इबाराकी प्रान्त के चिकुसेई में एग्रीवोल्टेइक कृषि प्रणाली का अध्ययन किया। इस प्रणाली में एक ही भूमि पर चावल की खेती और सौर ऊर्जा उत्पादन को एकीकृत किया गया। यह भूमि के बहुउद्देशीय उपयोग और कृषि क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा के समावेशन का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
सौर पैनलों के कारण चावल की उपज में कमी
छह फसल मौसमों में सौर पैनलों के नीचे चावल की औसत उपज लगभग 6.5 टन प्रति हेक्टेयर रही, जबकि खुले खेत में यह लगभग 8.5 टन प्रति हेक्टेयर थी। अर्थात एग्रीवोल्टेइक प्रणाली में चावल की उपज लगभग 23% कम रही। इसका प्रमुख कारण सौर पैनलों द्वारा सूर्य के प्रकाश की उपलब्धता में कमी होना था।
सूक्ष्म जलवायु और चावल की गुणवत्ता पर प्रभाव
सौर पैनलों ने खेत के सूक्ष्म जलवायु (Microclimate) को भी प्रभावित किया। पैनलों के नीचे दिन का अधिकतम तापमान खुले खेत की तुलना में लगभग 0.8°C कम पाया गया। छाया के कारण चावल की गुणवत्ता में भी परिवर्तन देखा गया, जैसे अधिक चॉक जैसे दाने, पिसाई के बाद साबुत चावल का कम अनुपात तथा प्रोटीन और एमाइलोज की मात्रा में वृद्धि। इससे स्पष्ट होता है कि कृषि उत्पादन में केवल मात्रा नहीं, बल्कि गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है।
कम कृषि उत्पादन के बावजूद अधिक आर्थिक मूल्य
अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि चावल उत्पादन और सौर बिजली के आर्थिक मूल्य को मिलाकर देखने पर एग्रीवोल्टेइक प्रणाली ने केवल चावल आधारित खेती की तुलना में लगभग 14 गुना अधिक सकल लाभ उत्पन्न किया। हालांकि यह परिणाम हर क्षेत्र और प्रत्येक फसल पर समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि आर्थिक लाभ स्थानीय परिस्थितियों, बिजली उत्पादन और प्रणाली के डिजाइन पर निर्भर करता है।
कृषि आय का विविधीकरण और भूमि का बहुउद्देशीय उपयोग
एग्रीवोल्टेइक प्रणाली “Food + Energy” के मॉडल को प्रस्तुत करती है। पारंपरिक कृषि में आय मुख्यतः फसल उत्पादन पर निर्भर होती है, जबकि इस मॉडल में किसान को कृषि के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा से भी अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है। यह जलवायु परिवर्तन, कृषि आय की अनिश्चितता और ऊर्जा संक्रमण जैसी चुनौतियों के बीच आय के विविधीकरण का महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है।
UPSC के लिए विशेष महत्व
यह समाचार GS Paper-III के अंतर्गत कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और किसानों की आय से जुड़ा हुआ है। मुख्य परीक्षा में इसे भूमि उपयोग दक्षता, कृषि-ऊर्जा एकीकरण और टिकाऊ कृषि के उदाहरण के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। यह अध्ययन दर्शाता है कि भविष्य की कृषि केवल खाद्य उत्पादन तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि वैज्ञानिक योजना के माध्यम से एक ही भूमि से खाद्य और स्वच्छ ऊर्जा का संयुक्त उत्पादन संभव है।
