हिमाचल प्रदेश में ओजोन आधारित पेयजल शोधन परियोजना की शुरुआत
हिमाचल प्रदेश के देहरा में राज्य की पहली ओजोन आधारित पेयजल शोधन परियोजना शुरू की गई, जिसके लिए लगभग ₹46 करोड़ आवंटित किए गए हैं। परियोजना में ओजोन (O₃) के शक्तिशाली ऑक्सीकरण गुणों का उपयोग कर पानी के सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करने और जल गुणवत्ता सुधारने का लक्ष्य है। राज्य में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए ‘मुख्यमंत्री का अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना तथा वन संरक्षण में युवा और महिला समूहों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। देहरा में शिक्षा, पशु चिकित्सा और पेयजल अवसंरचना के विस्तार पर जोर देकर समावेशी एवं सतत क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने की योजना है।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कांगड़ा जिले के देहरा में राज्य की पहली ओजोन आधारित पेयजल शोधन परियोजना का उद्घाटन किया। इस परियोजना के लिए सरकार ने लगभग ₹46 करोड़ आवंटित किए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को उपलब्ध पेयजल की गुणवत्ता में सुधार करना है।
ओजोन से जल शोधन कैसे होता है?
इस परियोजना में ओजोन (O₃) गैस का उपयोग पानी के कीटाणुशोधन के लिए किया जाएगा। ओजोन एक शक्तिशाली ऑक्सीकरण एजेंट (Oxidising Agent) है, जो बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करने में सक्षम है। जल उपचार में इसका उपयोग क्लोरीनीकरण के विकल्प या पूरक के रूप में किया जा सकता है। इससे पानी की गंध और स्वाद में भी सुधार हो सकता है।
परियोजना का व्यापक विस्तार
देहरा में परियोजना के कार्यान्वयन के बाद इसे हिमाचल प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने की योजना है। यह पहल सुरक्षित पेयजल, सार्वजनिक स्वास्थ्य और जल गुणवत्ता प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। पहाड़ी राज्यों में सुरक्षित जलापूर्ति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भौगोलिक परिस्थितियां जल अवसंरचना के विकास को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं।
‘मुख्यमंत्री का अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना
मुख्यमंत्री ने राज्य की एक अन्य कल्याणकारी पहल ‘मुख्यमंत्री का अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना का भी उल्लेख किया। पंचायत स्तर पर सर्वेक्षण शुरू किए गए हैं और योजना को 2 अक्टूबर से लागू करने की बात कही गई है। इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को वित्तीय सहायता तथा 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है। यह सामाजिक सुरक्षा और लक्षित कल्याणकारी योजनाओं का उदाहरण है।
वन संरक्षण में समुदाय की भागीदारी
राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के माध्यम से युवा और महिला समूहों को वनीकरण एवं वन संरक्षण में शामिल किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों को पौधरोपण के लिए प्रोत्साहन राशि के साथ ₹1.20 लाख तक की सहायता दिए जाने की बात कही गई है। यह पहल community participation, afforestation, livelihood generation और climate resilience को एक साथ जोड़ती है।
देहरा में शिक्षा एवं पशु चिकित्सा अवसंरचना
देहरा क्षेत्र में विकास योजनाओं के तहत CBSE से संबद्ध विद्यालयों को बढ़ावा देने और भविष्य में और स्कूल स्थापित करने की योजना बताई गई है। इसके अलावा बद्दल थोर में पशु चिकित्सालय स्थापित करने की घोषणा की गई। शिक्षा, स्वास्थ्य, पशुपालन और जलापूर्ति जैसी बुनियादी सेवाओं का विस्तार समावेशी एवं क्षेत्रीय विकास के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।