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सोन नदी जल समझौता: अंतरराज्यीय जल विवादों के समाधान में सहकारी संघवाद की मिसाल

Published 3 September 2026

बिहार और झारखंड ने सोन नदी के जल बंटवारे के लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने के लिए समझौता किया है, जिससे सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बेहतर होगी। इससे बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया व पटना तथा झारखंड के पलामू और गढ़वा क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। यह समझौता सहकारी संघवाद का उदाहरण है और अंतरराज्यीय नदी जल विवादों के संदर्भ में अनुच्छेद 262 तथा Inter-State River Water Disputes Act, 1956 के महत्व को दर्शाता है। वर्ष 2026 में यमुना जल परियोजना तथा किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना से जुड़े अन्य अंतरराज्यीय समझौते भी राज्यों के बीच जल सहयोग की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

बिहार और झारखंड ने सोन नदी के जल बंटवारे से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उपस्थित रहे। इसका प्रमुख उद्देश्य दोनों राज्यों में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता को बेहतर बनाना है।

समझौते से किन क्षेत्रों को लाभ मिलेगा?

समझौते से बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना जैसे क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। वहीं झारखंड के पलामू और गढ़वा जैसे क्षेत्रों को सिंचाई तथा पेयजल के लिए लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे कृषि उत्पादकता, ग्रामीण आजीविका और जल सुरक्षा को मजबूत करने में सहायता मिल सकती है।

सहकारी संघवाद का उदाहरण

यह समझौता Cooperative Federalism की अवधारणा का महत्वपूर्ण उदाहरण है। भारत में जल संसाधन कई बार एक से अधिक राज्यों से जुड़े होते हैं, इसलिए इनके प्रभावी प्रबंधन के लिए राज्यों के बीच सहयोग आवश्यक है। संवाद और सहमति के माध्यम से विवादों का समाधान ‘Team India’ की भावना को मजबूत करता है तथा संघ और राज्यों के बीच समन्वय को बढ़ावा देता है।

अंतरराज्यीय नदी जल विवाद और संवैधानिक प्रावधान

भारतीय संविधान में अंतरराज्यीय नदी जल विवादों के समाधान के लिए विशेष व्यवस्था है। अनुच्छेद 262 संसद को अंतरराज्यीय नदियों या नदी घाटियों के जल के उपयोग, वितरण और नियंत्रण से संबंधित विवादों के निर्णय के लिए कानून बनाने की शक्ति देता है। इसी संदर्भ में Inter-State River Water Disputes Act, 1956 महत्वपूर्ण है।

2026 में अन्य अंतरराज्यीय समझौते

सोन नदी समझौता वर्ष 2026 में राज्यों के बीच जल एवं नदी संसाधनों से संबंधित हुए कई महत्वपूर्ण समझौतों की कड़ी में आता है। 29 जून 2026 को राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल परियोजना को लेकर समझौता हुआ, जिसके तहत लगभग 580 मिलियन घन मीटर पानी राजस्थान को हस्तांतरित किया जाना प्रस्तावित है। इसके अलावा 16 जून 2026 को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान ने किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना से संबंधित समझौता किया।

UPSC के लिए व्यापक महत्व

सोन नदी जल समझौता GS-II (Polity & Governance), GS-I (Geography) और GS-III (Environment & Agriculture) के लिए महत्वपूर्ण है। इससे अंतरराज्यीय नदी जल विवाद, अनुच्छेद 262, सहकारी संघवाद, नदी बेसिन प्रबंधन, जल सुरक्षा, सिंचाई, पेयजल, कृषि और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों को जोड़ा जा सकता है। मुख्य परीक्षा में उत्तर लिखते समय केवल विवादों का उल्लेख करने के बजाय संवाद, डेटा-साझाकरण, नदी घाटी-स्तरीय प्रबंधन, जल दक्षता, पुनर्चक्रण और संस्थागत सहयोग को दीर्घकालिक समाधान के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।

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