शिक्षक दिवस — डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की स्मृति में शिक्षा और शिक्षक सम्मान
भारत में शिक्षक दिवस प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जो महान दार्शनिक, शिक्षाविद् और भारत के दूसरे राष्ट्रपति थे। भारत में शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा 1962 में शुरू हुई, जब डॉ. राधाकृष्णन ने अपने जन्मदिन को शिक्षकों के सम्मान के लिए समर्पित करने का सुझाव दिया। शिक्षक विद्यार्थियों में नैतिक मूल्य, आलोचनात्मक चिंतन, अनुशासन, रचनात्मकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर मानव पूंजी निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। NEP 2020 में शिक्षक प्रशिक्षण, सतत व्यावसायिक विकास और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा पर जोर दिया गया है, जिससे गुणवत्तापूर्ण Learning Outcomes को बढ़ावा मिलता है।
भारत में शिक्षक दिवस (Teachers’ Day) प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिवस शिक्षकों के योगदान, समर्पण और शिक्षा के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन से संबंध
भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाने का संबंध डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन से है।
उनका जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था। वे एक प्रसिद्ध दार्शनिक, शिक्षाविद् और राजनेता थे तथा स्वतंत्र भारत के दूसरे राष्ट्रपति (1962–1967) रहे।
उनके जन्मदिवस को उनके सम्मान में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
शिक्षक दिवस मनाने की शुरुआत
भारत में शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा 1962 में शुरू हुई। जब डॉ. राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति बने, तब उनके कुछ विद्यार्थियों और मित्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा व्यक्त की।
डॉ. राधाकृष्णन ने सुझाव दिया कि उनके जन्मदिन को व्यक्तिगत उत्सव के बजाय शिक्षकों के सम्मान के दिवस के रूप में मनाया जाए। इसके बाद 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका
शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे विद्यार्थियों में:
नैतिक मूल्यों
आलोचनात्मक चिंतन
अनुशासन
रचनात्मकता
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
नागरिक चेतना
का विकास करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसलिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सक्षम शिक्षकों को मानव पूंजी निर्माण (Human Capital Formation) का आधार माना जाता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और शिक्षक की भूमिका
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में शिक्षकों को शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। नीति में शिक्षक प्रशिक्षण, सतत व्यावसायिक विकास, बहुविषयक शिक्षा और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पर जोर दिया गया है।
शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार का सीधा संबंध Learning Outcomes और शिक्षा की समग्र गुणवत्ता से है।
UPSC के लिए व्यापक महत्व
शिक्षक दिवस का विषय GS Paper-II के शिक्षा एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े प्रश्नों के लिए उपयोगी है। इसे मानव पूंजी, समावेशी शिक्षा और सतत विकास से भी जोड़ा जा सकता है।
मानव पूंजी: गुणवत्तापूर्ण शिक्षक बेहतर मानव संसाधन तैयार करने में योगदान देते हैं।
सामाजिक विकास: शिक्षा सामाजिक गतिशीलता और असमानता कम करने का माध्यम है।
समान अवसर: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समाज के वंचित वर्गों को आगे बढ़ने का अवसर देती है।
SDG-4: शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता और सतत विकास लक्ष्य-4 (Quality Education) प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
NEP 2020: शिक्षक प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण शिक्षा सुधार के प्रमुख घटक हैं।
राष्ट्र निर्माण: शिक्षक जिम्मेदार, जागरूक और लोकतांत्रिक नागरिकों के निर्माण में योगदान देते हैं।