दिनेश शर्मा बने अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल: रणनीतिक केंद्रशासित प्रदेश में नई नियुक्ति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भाजपा नेता एवं राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया है, जो सेवानिवृत्त एडमिरल डी.के. जोशी का स्थान लेंगे। दिनेश शर्मा उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और उनकी नियुक्ति केंद्रशासित प्रदेश की प्रशासनिक एवं संवैधानिक व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। अंडमान-निकोबार की मलक्का जलडमरूमध्य के निकट रणनीतिक स्थिति इसे हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। यह क्षेत्र राष्ट्रीय सुरक्षा, ब्लू इकॉनमी, समुद्री संसाधन, कनेक्टिविटी, पर्यटन और Act East Policy के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भाजपा नेता एवं राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) नियुक्त किया है। राष्ट्रपति भवन ने 5 सितंबर 2026 को इसकी अधिसूचना जारी की। नियुक्ति उनके द्वारा नए पद का कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी। वह वर्तमान उपराज्यपाल सेवानिवृत्त एडमिरल डी.के. जोशी का स्थान लेंगे, जो अक्टूबर 2017 से इस पद पर कार्यरत हैं।
दिनेश शर्मा का राजनीतिक एवं प्रशासनिक अनुभव
दिनेश शर्मा उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता हैं और इससे पहले उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्हें राज्य एवं राष्ट्रीय राजनीति तथा भाजपा संगठन में लंबे अनुभव के लिए जाना जाता है। वर्तमान में वह राज्यसभा के सदस्य हैं। उनका राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होने वाला है। उपराज्यपाल के रूप में नई जिम्मेदारी उन्हें एक महत्वपूर्ण केंद्रशासित प्रदेश के प्रशासनिक एवं संवैधानिक पद पर ले जाएगी।
केंद्रशासित प्रदेशों में उपराज्यपाल की भूमिका
उपराज्यपाल केंद्रशासित प्रदेश में राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है। केंद्रशासित प्रदेशों की प्रशासनिक व्यवस्था संबंधित संवैधानिक प्रावधानों और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के तहत संचालित होती है। अंडमान और निकोबार जैसे केंद्रशासित प्रदेश में उपराज्यपाल की भूमिका प्रशासन, कानून-व्यवस्था, विकास, केंद्र सरकार के साथ समन्वय और रणनीतिक मामलों में महत्वपूर्ण होती है। UPSC के लिए उपराज्यपाल और राज्यपाल के बीच अंतर तथा केंद्रशासित प्रदेशों की संवैधानिक व्यवस्था महत्वपूर्ण विषय है।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का सामरिक महत्व
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की सामरिक स्थिति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह द्वीपसमूह मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित है, जो हिंद महासागर और प्रशांत क्षेत्र के बीच एक महत्वपूर्ण समुद्री संपर्क मार्ग है। इसकी भौगोलिक स्थिति भारत को समुद्री निगरानी, समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक उपस्थिति के लिए महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विकास के दृष्टिकोण से महत्व
अंडमान और निकोबार का महत्व केवल सैन्य दृष्टि से नहीं है। यह क्षेत्र ब्लू इकॉनमी, समुद्री संसाधन, पर्यटन, कनेक्टिविटी, द्वीपीय विकास और आपदा प्रबंधन के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत की Act East Policy तथा व्यापक Indo-Pacific रणनीति के संदर्भ में भी इसका विशेष महत्व है। यहां स्थित भारतीय सैन्य एवं समुद्री अवसंरचना भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता को मजबूत करती है।
UPSC के लिए प्रमुख बिंदु
इस नियुक्ति को पढ़ते समय UPSC अभ्यर्थियों को अनुच्छेद 239, केंद्रशासित प्रदेशों का प्रशासन, उपराज्यपाल की भूमिका, राष्ट्रपति की शक्तियां, अंडमान-निकोबार की भौगोलिक स्थिति और हिंद महासागर क्षेत्र को एक साथ समझना चाहिए। अंडमान-निकोबार भारत के लिए Indo-Pacific, SAGAR (Security and Growth for All in the Region), समुद्री सुरक्षा और Act East Policy के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। GS Paper-2 में यह Polity & Governance तथा GS Paper-1 में Geography से जुड़ता है, जबकि GS Paper-3 में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा के संदर्भ में उपयोग किया जा सकता है।