शीतल देवी ने हुंडई वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में जीता पहला व्यक्तिगत स्वर्ण
भारत की पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने अहमदाबाद में हुंडई वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज की कंपाउंड महिला व्यक्तिगत स्पर्धा में अपना पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता। फाइनल में उन्होंने कजाकिस्तान की आइजादा सेदान को शूट-ऑफ में X-रिंग पर निशाना लगाकर हराया। भारत की सरिता ने इसी स्पर्धा में कांस्य पदक जीता, जबकि हरविंदर सिंह और भावना ने रिकर्व मिश्रित टीम स्पर्धा में चीन को 6-0 से हराकर स्वर्ण जीता। हरविंदर सिंह ने रिकर्व पुरुष वर्ग में भी स्वर्ण पदक हासिल किया, जिससे प्रतियोगिता में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा।
भारत की पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने अहमदाबाद में आयोजित हुंडई वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में कंपाउंड महिला व्यक्तिगत स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। यह इस प्रतियोगिता में उनका पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक है।
शूट-ऑफ में कजाकिस्तान की आइजादा सेदान को हराया
फाइनल में शीतल देवी का मुकाबला कजाकिस्तान की आइजादा सेदान से हुआ। दोनों खिलाड़ियों ने शुरुआत में 30-30 का समान स्कोर बनाया। मुकाबला बराबरी पर रहने के बाद शूट-ऑफ हुआ, जिसमें शीतल देवी ने X-रिंग पर निशाना लगाकर जीत हासिल की।
तीरंदाजी में X-रिंग का महत्व
X-रिंग, 10-अंक वाली केंद्रीय रिंग के अंदर स्थित सबसे छोटी रिंग होती है। जब दो तीरंदाजों का स्कोर बराबर हो जाता है, तो शूट-ऑफ में X के निकट या X पर लगाया गया निशाना विजेता तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह तथ्य UPSC Prelims के लिए उपयोगी है।
भारत का अन्य पदक प्रदर्शन
महिला कंपाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा में भारत की सरिता ने कांस्य पदक जीता। उन्होंने चीन की वांग हुईटिंग को हराया। इस प्रकार भारत ने इस स्पर्धा में स्वर्ण और कांस्य दोनों पदक हासिल किए।
रिकर्व मिश्रित टीम में भी भारत को स्वर्ण
भारत के हरविंदर सिंह और भावना ने रिकर्व मिश्रित टीम फाइनल में चीन की जोड़ी को 6-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। हरविंदर सिंह के लिए यह प्रतियोगिता विशेष रूप से सफल रही, क्योंकि उन्होंने रिकर्व पुरुष वर्ग में भी स्वर्ण पदक हासिल किया।
UPSC के लिए महत्व: पैरा-स्पोर्ट्स और समावेशी विकास
शीतल देवी की उपलब्धि केवल खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि दिव्यांगजन सशक्तिकरण, समावेशी खेल और समान अवसर के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। UPSC अभ्यर्थियों को इस समाचार को खेल एवं युवा मामले, दिव्यांगजन अधिकार, समावेशी विकास और भारत की अंतरराष्ट्रीय खेल उपलब्धियों से जोड़कर देखना चाहिए। शीतल देवी की यह जीत आइची-नागोया 2026 एशियाई पैरा खेलों से पहले भारत के लिए महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक बढ़त भी प्रदान करती है।