धीरज बोम्मादेवरा ने तीरंदाजी विश्व कप फाइनल में रचा इतिहास
भारतीय रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने मैक्सिको के साल्टिलो में तीरंदाजी विश्व कप फाइनल का पुरुष रिकर्व खिताब जीतकर इतिहास रचा और इस स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष बने। फाइनल में उन्होंने जापान के नाकानिशी जुन्या को 5-5 की बराबरी के बाद शूट-ऑफ में 10-9 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। इससे भारत का पुरुष रिकर्व तीरंदाजी विश्व कप फाइनल में पहला स्वर्ण पदक हासिल करने का लंबा इंतजार समाप्त हुआ। इससे पहले जयंता तालुकदार ने 2010 में कांस्य पदक जीता था, जबकि डोला बनर्जी 2007 में महिला व्यक्तिगत वर्ग की चैंपियन बनी थीं।
भारतीय रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने मैक्सिको के साल्टिलो में तीरंदाजी विश्व कप फाइनल का पुरुष रिकर्व खिताब जीतकर इतिहास रचा। वे इस स्पर्धा में विश्व कप फाइनल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष तीरंदाज बन गए।
रोमांचक फाइनल मुकाबला:
फाइनल में धीरज का सामना जापान के नाकानिशी जुन्या से हुआ। पांच सेटों के बाद दोनों खिलाड़ी 5-5 अंक की बराबरी पर रहे, जिसके बाद विजेता का फैसला शूट-ऑफ के माध्यम से किया गया।
शूट-ऑफ में निर्णायक प्रदर्शन:
शूट-ऑफ में धीरज ने 10 अंक हासिल किए, जबकि नाकानिशी 9 अंक ही प्राप्त कर सके। इस प्रदर्शन के आधार पर धीरज ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
भारत का पहला पुरुष रिकर्व विश्व कप फाइनल स्वर्ण:
इस जीत के साथ भारत ने पुरुषों के रिकर्व तीरंदाजी विश्व कप फाइनल में अपना पहला स्वर्ण पदक हासिल किया। यह धीरज के करियर की अब तक की सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों में से एक है।
जयंता तालुकदार के बाद नई उपलब्धि:
इससे पहले भारतीय पुरुषों में जयंता तालुकदार ने 2010 में एडिनबर्ग में आयोजित तीरंदाजी विश्व कप फाइनल में कांस्य पदक जीता था। धीरज की जीत ने पुरुष रिकर्व वर्ग में भारत के स्वर्ण पदक के लंबे इंतजार को समाप्त किया।
भारतीय तीरंदाजी के लिए व्यापक महत्व:
धीरज की सफलता ने तीरंदाजी में भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत किया है। इससे पहले डोला बनर्जी ने 2007 में दुबई में महिला व्यक्तिगत वर्ग का विश्व कप फाइनल स्वर्ण जीता था। वहीं दीपिका कुमारी विश्व कप फाइनल में छह पदकों के साथ भारत की सबसे सफल तीरंदाजों में शामिल हैं।