भारत ने संयुक्त राष्ट्र साइबर अपराध कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए, वैश्विक डिजिटल सहयोग को मिलेगा नया आधार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 25 सितंबर 2026 को भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र साइबर अपराध कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य साइबर अपराध के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना है। कन्वेंशन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संग्रह, संरक्षण और आदान-प्रदान तथा सीमा-पार साइबर अपराधों की जांच के लिए 24/7 सहयोग नेटवर्क का प्रावधान करता है। इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 24 दिसंबर 2024 को प्रस्ताव 79/243 के माध्यम से अपनाया था और वार्ता प्रक्रिया में लगभग पांच वर्ष लगे। अनुच्छेद 65 के अनुसार, यह 40वें अनुसमर्थन/स्वीकृति/अनुमोदन/अभिगमन के 90 दिन बाद लागू होगा और 26 सितंबर 2026 तक यह अभी लागू नहीं हुआ था।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 25 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र साइबर अपराध कन्वेंशन पर भारत की ओर से हस्ताक्षर किए। संयुक्त राष्ट्र की संधि-सूची भी भारत के हस्ताक्षर की तारीख 25 सितंबर 2026 दर्ज करती है। इसका उद्देश्य साइबर अपराध की रोकथाम और जांच में अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा गंभीर अपराधों से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आदान-प्रदान को मजबूत करना है।
कन्वेंशन का उद्देश्य और महत्व:
इसका आधिकारिक शीर्षक United Nations Convention against Cybercrime; Strengthening International Cooperation for Combating Certain Crimes Committed by Means of Information and Communications Technology Systems and for the Sharing of Evidence in Electronic Form of Serious Crimes है। यह साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक साझा अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा उपलब्ध कराता है, विशेष रूप से तब जब अपराधी, पीड़ित और डिजिटल साक्ष्य अलग-अलग देशों में स्थित हों।
डिजिटल साक्ष्य और 24/7 सहयोग:
कन्वेंशन की प्रमुख विशेषता इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संग्रह, संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान में सहयोग को सुगम बनाना है। इसके तहत राज्यों के बीच त्वरित सहयोग के लिए 24/7 नेटवर्क की व्यवस्था भी की गई है। यह साइबर धोखाधड़ी, ऑनलाइन अपराध और सीमा-पार डिजिटल अपराधों की जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है।
कन्वेंशन कब अपनाया गया:
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस कन्वेंशन को 24 दिसंबर 2024 को प्रस्ताव 79/243 के माध्यम से अपनाया था। इसके लिए वार्ता प्रक्रिया लगभग पांच वर्षों तक चली और संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स एंड क्राइम ऑफिस (UNODC) ने वार्ताओं के सचिवालय के रूप में कार्य किया। हस्ताक्षर के लिए पहला औपचारिक समारोह 25-26 अक्टूबर 2025 को हनोई, वियतनाम में आयोजित हुआ था।
हस्ताक्षर और अनुसमर्थन में अंतर:
हस्ताक्षर करना और संधि का लागू होना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। कन्वेंशन के अनुच्छेद 65 के अनुसार यह 40वें अनुसमर्थन, स्वीकृति, अनुमोदन या अभिगमन के दस्तावेज के जमा होने के 90 दिन बाद लागू होगा। संयुक्त राष्ट्र संधि-संग्रह के 26 सितंबर 2026 के रिकॉर्ड के अनुसार कन्वेंशन अभी ‘Not yet in force’ है।
UPSC के लिए व्यापक महत्व:
यह विषय GS Paper-II के अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और GS Paper-III के साइबर सुरक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा दोनों से जुड़ा है। उत्तर लेखन में इसे सीमा-पार साइबर अपराध, डिजिटल संप्रभुता, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग, डेटा संरक्षण, साइबर आतंकवाद और बहुपक्षीय साइबर शासन से जोड़ा जा सकता है। भारत के लिए यह डिजिटल अर्थव्यवस्था की सुरक्षा तथा वैश्विक साइबर सहयोग में सक्रिय भूमिका के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
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