‘प्रहार’ आतंकवाद-रोधी रणनीति और नया प्रत्यर्पण पोर्टल: अंतरराष्ट्रीय अपराध नियंत्रण में अंतर-एजेंसी समन्वय को बढ़ावा
28 सितंबर 2026 को अमित शाह ने नया Extradition Portal लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य भगोड़े अपराधियों की वापसी में केंद्रीय एजेंसियों, राज्य पुलिस और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाना है। भारत ने 2019–2026 के दौरान 36 देशों से 288 भगोड़े अपराधियों को वापस लाया है, जबकि BHARATPOL अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग और सूचना साझा करने को मजबूत करता है। फरवरी 2026 में शुरू ‘प्रहार’ राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति सात स्तंभों के माध्यम से रोकथाम, त्वरित प्रतिक्रिया, मानवाधिकार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और लचीलापन पर केंद्रित है। इसके तहत आतंकवाद-रोधी व्यवस्था को पुलिस थाना स्तर तक मजबूत करने और केंद्र-राज्य एजेंसियों के बीच खुफिया सूचना एवं त्वरित प्रतिक्रिया का समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
28 सितंबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में नए Extradition Portal का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य विदेशों में मौजूद भगोड़े अपराधियों की वापसी के लिए केंद्रीय एजेंसियों, राज्य पुलिस और अंतरराष्ट्रीय कानून-प्रवर्तन संस्थाओं के बीच समन्वय को बेहतर बनाना तथा प्रक्रिया में तेजी लाना है। गृह मंत्रालय के अनुसार, 2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 288 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया।
प्रत्यर्पण का अर्थ और भारत में इसका महत्व
प्रत्यर्पण (Extradition) वह कानूनी प्रक्रिया है जिसके तहत एक देश किसी आरोपी या दोषसिद्ध व्यक्ति को दूसरे देश को सौंपता है, ताकि उसके विरुद्ध मुकदमा चलाया जा सके या सजा लागू की जा सके। यह प्रक्रिया केवल पुलिस कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसमें कानूनी, राजनयिक और अंतरराष्ट्रीय कानून-प्रवर्तन सहयोग शामिल होता है। भगोड़े अपराधियों की वापसी संगठित अपराध, आतंकवाद, मादक पदार्थ तस्करी, साइबर अपराध और आर्थिक अपराध के विरुद्ध भारत की आंतरिक सुरक्षा रणनीति से जुड़ी है।
BHARATPOL और अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग
भारत ने अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग को मजबूत करने के लिए BHARATPOL प्लेटफॉर्म विकसित किया है। यह CBI द्वारा विकसित व्यवस्था है, जो भारतीय कानून-प्रवर्तन एजेंसियों को अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग तंत्र से जोड़ती है। सरकार के अनुसार, BHARATPOL ने 1,400 से अधिक एजेंसियों को एकीकृत किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय सूचना साझा करने की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हुई है। इसका महत्व विशेष रूप से ऐसे अपराधों में है जिनमें अपराधी, वित्तीय नेटवर्क या आपराधिक गतिविधियाँ कई देशों में फैली होती हैं।
‘प्रहार’: भारत की राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति एवं रणनीति
भारत ने फरवरी 2026 में National Counter-Terrorism Policy & Strategy – ‘PRAHAAR’ जारी की। इसका उद्देश्य आतंकवाद और कट्टरपंथ से निपटने के लिए Whole-of-Government और Whole-of-Society approach को संस्थागत बनाना है। इसके सात प्रमुख स्तंभ हैं—आतंकी हमलों की रोकथाम, खतरे के अनुरूप त्वरित एवं अनुपातिक प्रतिक्रिया, आंतरिक क्षमताओं का एकीकरण, मानवाधिकार एवं कानून का शासन, आतंकवाद को सक्षम बनाने वाली परिस्थितियों को कम करना, अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में समन्वय तथा पुनर्प्राप्ति एवं लचीलापन।
थाना स्तर तक आतंकवाद-रोधी व्यवस्था का विस्तार
‘प्रहार’ का महत्वपूर्ण पहलू आतंकवाद-रोधी क्षमताओं को केवल केंद्रीय सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों तक सीमित न रखकर पुलिस थाना स्तर तक ले जाना है। सरकार ने विभिन्न स्तरों पर स्वचालित एवं संस्थागत आतंकवाद-रोधी प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित करने तथा राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, सूचना-साझाकरण और त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता को मजबूत करना है।
UPSC के लिए व्यापक प्रासंगिकता
यह विषय GS Paper-III – आंतरिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे सीमा-पार अपराध, आतंकवाद, कट्टरपंथ, संगठित अपराध, साइबर अपराध, मादक पदार्थ तस्करी, प्रत्यर्पण, INTERPOL, अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग और तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ा जा सकता है। Mains में उत्तर लिखते समय भारत की सुरक्षा व्यवस्था में केंद्र-राज्य समन्वय, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करना, मानवाधिकार एवं Rule of Law के बीच संतुलन को शामिल किया जा सकता है। ‘प्रहार’ के सात स्तंभ और Extradition Portal तथा BHARATPOL जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भारत के आंतरिक सुरक्षा तंत्र में संस्थागत एवं तकनीकी सुधार के उदाहरण हैं।