RBI ने NBFC-Upper Layer की नई सूची जारी की, चार सरकारी वित्तीय कंपनियां पहली बार शामिल
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए NBFC-Upper Layer (NBFC-UL) की संशोधित सूची जारी की, जिसमें कुल 17 NBFCs शामिल हैं, जबकि पिछली सूची में 15 थीं। REC, PFC, IRFC और HUDCO को पहली बार Upper Layer में शामिल किया गया है, जिससे इन पर अधिक कठोर नियामकीय निगरानी लागू होगी। RBI के Scale-Based Regulation (SBR) के तहत NBFCs को Base, Middle, Upper और Top Layer में वर्गीकृत किया जाता है, जिसमें Upper Layer में बड़ी और प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण NBFCs आती हैं। Tata Sons को सूची में बरकरार रखा गया है, जबकि PNB Housing Finance और Sammaan Capital संशोधित पात्रता मानदंडों के कारण नई सूची में शामिल नहीं हैं।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए Non-Banking Financial Company–Upper Layer (NBFC-UL) की संशोधित सूची जारी की है। नई सूची में कुल 17 NBFCs शामिल हैं, जबकि पिछली सूची में 15 संस्थाएं थीं। यह बदलाव RBI द्वारा NBFC-UL की पहचान संबंधी व्यवस्था की समीक्षा और संशोधित मानदंड लागू करने के बाद किया गया है।
चार सरकारी NBFC पहली बार Upper Layer में शामिल:
नई सूची में REC Limited, Power Finance Corporation (PFC), Indian Railway Finance Corporation (IRFC) और Housing & Urban Development Corporation (HUDCO) को पहली बार NBFC-UL में शामिल किया गया है। यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि RBI ने सरकारी स्वामित्व वाली NBFCs को भी संशोधित Scale-Based Regulation (SBR) के तहत अधिक सख्त नियामकीय निगरानी के दायरे में लाने की व्यवस्था की है।
NBFC के लिए Scale-Based Regulation क्या है?
RBI ने NBFCs के लिए Scale-Based Regulation (SBR) लागू किया है, जिसके तहत NBFCs को उनके आकार, गतिविधियों और जोखिम की प्रकृति के आधार पर चार स्तरों में वर्गीकृत किया जाता है—Base Layer, Middle Layer, Upper Layer और Top Layer। Upper Layer में बड़ी तथा अधिक प्रणालीगत महत्व वाली NBFCs आती हैं और इनके लिए अपेक्षाकृत अधिक कठोर नियामकीय एवं पर्यवेक्षी प्रावधान लागू होते हैं।
Upper Layer में शामिल होने का आधार और महत्व:
संशोधित व्यवस्था में बड़े आकार की NBFCs की पहचान के लिए Asset Under Management (AUM) सहित विभिन्न मानदंडों और स्कोरिंग पद्धति का उपयोग किया जाता है। व्यापक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन NBFCs का वित्तीय प्रणाली पर अधिक प्रभाव हो सकता है, उन पर पर्याप्त पूंजी, जोखिम प्रबंधन, बड़े एक्सपोजर और कॉरपोरेट गवर्नेंस संबंधी निगरानी रहे। RBI के SBR ढांचे में NBFC-UL के लिए enhanced regulatory oversight तथा large-exposure framework जैसे प्रावधान मौजूद हैं।
टाटा संस और अन्य कंपनियों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य:
Tata Sons Private Limited को भी Upper Layer सूची में बनाए रखा गया है। हालांकि, Upper Layer सूची में बने रहने का अर्थ यह नहीं है कि उसके NBFC पंजीकरण को लेकर लंबित किसी आवेदन का परिणाम पहले से तय हो गया है। वहीं, PNB Housing Finance और Sammaan Capital नई सूची में शामिल नहीं हैं क्योंकि वे संशोधित पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते। RBI के नियमों के अनुसार, Upper Layer में वर्गीकृत NBFC को पात्रता मानदंड से बाहर होने के बाद भी निर्धारित अवधि तक उन्नत नियामकीय ढांचे के अंतर्गत रखा जा सकता है।
UPSC के लिए व्यापक महत्व:
यह विषय भारतीय वित्तीय प्रणाली, बैंकिंग सुधार, NBFCs, वित्तीय स्थिरता और RBI की नियामकीय भूमिका के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। NBFCs बैंकिंग प्रणाली के समान जमा स्वीकार करने वाले बैंक नहीं होते, लेकिन वे ऋण, उपभोक्ता वित्त, बुनियादी ढांचा वित्त और अन्य वित्तीय सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बड़ी NBFC में उत्पन्न जोखिम वित्तीय प्रणाली में फैल सकता है; इसलिए RBI का Scale-Based Regulation दृष्टिकोण वित्तीय क्षेत्र में systemic risk को नियंत्रित करने, जोखिम-आधारित पर्यवेक्षण बढ़ाने और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने का प्रयास है। यह मुद्दा UPSC में GS Paper III—Indian Economy, Banking Sector, Financial Regulation, Financial Stability और Systemic Risk से जोड़ा जा सकता है।
