Semicon 2.0: भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में ₹1.27 लाख करोड़ का बड़ा कदम
भारत सरकार ने 31 अगस्त 2026 को Semicon 2.0 शुरू करने की घोषणा की, जिसके तहत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास पर लगभग ₹1.27 लाख करोड़ खर्च किए जाएंगे। इस योजना में वेफर फैब्रिकेशन, चिप डिजाइन, पैकेजिंग, उपकरण एवं सामग्री, R&D तथा कौशल विकास को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक Semiconductor Value Chain में मजबूत बनाना है। सरकार ने अब तक लगभग 85,000 सेमीकंडक्टर इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया है और अतिरिक्त 1 लाख इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें Tier-2 व Tier-3 शहरों पर भी जोर है। योजना से लगभग 50,000–60,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है; परियोजनाओं की सामान्य अवधि छह वर्ष होगी और आवेदन तीन वर्षों तक किए जा सकेंगे।
भारत सरकार ने 31 अगस्त 2026 को Semicon 2.0 शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत देश में सेमीकंडक्टर निर्माण एवं डिजाइनिंग के व्यापक इकोसिस्टम के विकास पर लगभग ₹1.27 लाख करोड़ खर्च किए जाएंगे। यह Semicon India Programme का विस्तार है और इसका प्रमुख उद्देश्य भारत को वैश्विक Semiconductor Value Chain में एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाना है।
Semicon 2.0 के प्रमुख क्षेत्र
यह पहल सेमीकंडक्टर क्षेत्र के पूरे मूल्य-श्रृंखला तंत्र को विकसित करने पर केंद्रित है। इसमें वेफर फैब्रिकेशन, चिप डिजाइन, पैकेजिंग, सेमीकंडक्टर उपकरण एवं सामग्री, अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा कौशल विकास शामिल हैं। योजना को छह स्तंभों और दस श्रेणियों के आधार पर लागू किया जाना है। इससे भारत केवल चिप असेंबली तक सीमित न रहकर डिजाइन से लेकर विनिर्माण तक अपनी क्षमता विकसित कर सकेगा।
वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में भारत की भूमिका
सेमीकंडक्टर आधुनिक अर्थव्यवस्था की आधारभूत तकनीक है, जिसका उपयोग स्मार्टफोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, रक्षा उपकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दूरसंचार और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में होता है। सरकार का लक्ष्य भारत की वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में हिस्सेदारी को बढ़ाना है। भारत की कुशल मानव पूंजी, बड़ा घरेलू बाजार, नीतिगत स्थिरता और Ease of Doing Business को इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के प्रमुख आधार के रूप में देखा जा रहा है।
सेमीकंडक्टर प्रतिभा और कौशल विकास
Semicon 2.0 में Skill Development और Semiconductor Design पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार के अनुसार, भारत ने चार वर्षों में लगभग 85,000 सेमीकंडक्टर इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया है, जबकि अब लगभग 1 लाख अतिरिक्त इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग का विस्तार केवल बड़े तकनीकी शहरों तक सीमित नहीं है; Tier-2 और Tier-3 शहरों के छात्रों ने भी 250 से अधिक चिप डिजाइन किए हैं।
निवेश, रोजगार और परियोजना क्रियान्वयन
सरकार Semicon India Programme के अंतर्गत परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी और उत्पादन तक पहुँचाने पर जोर दे रही है। कुछ परियोजनाओं में शिलान्यास के लगभग 13 महीनों के भीतर वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने का उल्लेख किया गया है। विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम से लगभग 50,000–60,000 प्रत्यक्ष रोजगार तथा इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में अतिरिक्त अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। Semicon 2.0 की परियोजनाओं की सामान्य अवधि लगभग छह वर्ष होगी और योजना के तहत आवेदन लगभग तीन वर्ष तक किए जा सकेंगे।
India Semiconductor Mission और UPSC महत्व
India Semiconductor Mission (ISM) Semicon 2.0 की नोडल एजेंसी होगी। यह आवेदन आमंत्रित करने, तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन, परियोजनाओं की सिफारिश और उनके क्रियान्वयन में सहायता जैसी जिम्मेदारियाँ निभाएगी। UPSC के लिए यह विषय GS-III (Science & Technology + Economy) के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे Semiconductor Value Chain, Atmanirbhar Bharat, Strategic Technology, Electronics Manufacturing, R&D, Skill Development, Supply-Chain Resilience और Geopolitics of Technology को जोड़ा जा सकता है। मुख्य परीक्षा में यह तर्क दिया जा सकता है कि घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमता भारत की तकनीकी संप्रभुता, आर्थिक सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।