भारत-नेपाल सीमा पर क्रॉस-बॉर्डर भूमि कब्जे की UAV मैपिंग, 3 वर्ष में तकनीकी समाधान का लक्ष्य
भारत और नेपाल ने सीमा पार भूमि पर खेती एवं निवास से जुड़े Cross-Border Occupation का संयुक्त तकनीकी मानचित्रण करने पर सहमति जताई है, जिसमें UAV आधारित हवाई तस्वीरों का उपयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य भूमि स्वामित्व पर तत्काल निर्णय लेना नहीं, बल्कि सीमा की स्थिति और भूमि उपयोग से संबंधित विश्वसनीय तकनीकी एवं वैज्ञानिक डेटा तैयार करना है। लगभग 1,880 किमी लंबी भारत-नेपाल सीमा पर नदी के मार्ग में परिवर्तन और सीमा स्तंभों के क्षतिग्रस्त या लापता होने से कई तकनीकी चुनौतियां उत्पन्न हुई हैं। इस प्रक्रिया में Boundary Working Group, Survey Officials’ Committee और Joint Field Survey Teams जैसे द्विपक्षीय तंत्र सहयोग करेंगे, जबकि कालापानी और सुस्ता जैसे संवेदनशील क्षेत्र इससे अलग हैं।
भारत और नेपाल ने सीमा के दोनों ओर मौजूद Cross-Border Occupation यानी ऐसी भूमि, जहाँ एक देश के नागरिक दूसरे देश के क्षेत्र में खेती या निवास कर रहे हैं, का संयुक्त तकनीकी मानचित्रण करने पर सहमति बनाई है। यह निर्णय Survey Officials’ Committee (SOC) की 13वीं बैठक में लिया गया। दोनों देश इस प्रक्रिया में आधुनिक सर्वेक्षण तकनीक और UAV आधारित हवाई चित्रों का इस्तेमाल करेंगे।
UAV आधारित मैपिंग का उद्देश्य:
प्रस्तावित सर्वेक्षण में Unmanned Aerial Vehicles (UAVs) के माध्यम से उच्च-रिजॉल्यूशन हवाई तस्वीरें प्राप्त की जाएंगी। दोनों देशों के तकनीकी विशेषज्ञ इन तस्वीरों का संयुक्त विश्लेषण करेंगे, ताकि क्रॉस-बॉर्डर खेती, निवास और भूमि उपयोग का वास्तविक विस्तार निर्धारित किया जा सके। इसका तत्काल उद्देश्य किसी भूमि पर स्वामित्व का राजनीतिक निर्णय लेना नहीं, बल्कि विश्वसनीय तकनीकी एवं वैज्ञानिक डेटा तैयार करना है। भारत-नेपाल के तकनीकी तंत्र में UAV और नई सर्वेक्षण तकनीकों के उपयोग को पहले भी बढ़ावा दिया गया है।
नदी के मार्ग में परिवर्तन और सीमा संबंधी समस्या:
भारत-नेपाल सीमा के कुछ हिस्सों में नदी-आधारित सीमांकन के कारण तकनीकी जटिलताएं उत्पन्न हुई हैं। समय के साथ नदियों के मार्ग में परिवर्तन होने से ऐसी स्थिति बनी है, जिसमें एक देश के नागरिक ऐसी भूमि पर खेती या निवास करते पाए जाते हैं जो निर्धारित सीमा के अनुसार दूसरे देश की ओर आती है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भी इसे Fixed Boundary Principle से उत्पन्न Cross-Border Occupation की समस्या के रूप में स्पष्ट किया है।
भारत-नेपाल सीमा और सीमा स्तंभ:
भारत और नेपाल लगभग 1,880 किलोमीटर लंबी खुली सीमा साझा करते हैं, जो नेपाल के 27 जिलों से जुड़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सीमा पर 8,554 सीमा स्तंभ हैं, जिनमें लगभग 1,325 लापता और 1,956 क्षतिग्रस्त बताए गए हैं। सीमा स्तंभों का पुनर्निर्माण, मरम्मत और रखरखाव दोनों देशों के तकनीकी सीमा तंत्र के प्रमुख कार्यों में शामिल है।
सीमा प्रबंधन का संस्थागत तंत्र:
भारत और नेपाल सीमा संबंधी तकनीकी मुद्दों के समाधान के लिए Boundary Working Group (BWG), Survey Officials’ Committee (SOC) और Joint Field Survey Teams (JFST/FST) जैसे तंत्रों के माध्यम से सहयोग करते हैं। BWG की स्थापना 2014 में हुई थी। इन तंत्रों के अंतर्गत सीमा स्तंभों का निर्माण एवं रखरखाव, नो-मैन्स लैंड का प्रबंधन, GPS आधारित मैपिंग और Cross-Border Occupation से संबंधित डेटा संग्रह जैसे कार्य किए जाते हैं। कालापानी और सुस्ता जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े सीमा विवाद इस तकनीकी तंत्र के दायरे से अलग रखे गए हैं।
UPSC के लिए महत्व:
यह समाचार GS Paper-2 – भारत एवं उसके पड़ोसी देशों से संबंध, सीमा प्रबंधन, क्षेत्रीय सहयोग और भू-स्थानिक तकनीक (Geospatial Technology) के लिए महत्वपूर्ण है। उत्तर में इसे उदाहरण के रूप में प्रयोग किया जा सकता है कि कैसे UAV, GPS, GIS और हाई-रिजॉल्यूशन इमेजरी सीमा प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक और प्रमाण-आधारित बना सकते हैं। साथ ही, भारत-नेपाल की खुली सीमा लोगों के बीच सामाजिक एवं आर्थिक संपर्क को बढ़ाती है, लेकिन इसके साथ अवैध गतिविधियों, सीमा स्तंभों के रखरखाव और भूमि उपयोग जैसी चुनौतियां भी जुड़ी हैं। इसलिए इस पहल को तकनीकी सहयोग + कूटनीतिक संवाद + प्रभावी सीमा प्रबंधन के संयुक्त मॉडल के रूप में देखा जा सकता है।
