WEF Chief Economists’ Outlook 2026: भारत की विकास संभावनाओं को मिला वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत आकलन
WEF की सितंबर 2026 Chief Economists’ Outlook में भारत की विकास संभावनाओं को मजबूत माना गया, जिसमें 98% अर्थशास्त्रियों ने मध्यम या उससे बेहतर और 74% ने मजबूत या बहुत मजबूत वृद्धि की उम्मीद जताई। भारत की वृद्धि का प्रमुख आधार मजबूत घरेलू मांग है, जबकि चीन और यूरोप की विकास संभावनाओं का आकलन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। WEF ने 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि का अनुमान 6.7% रखा है, लेकिन ऊंची ऊर्जा कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक विखंडन प्रमुख जोखिम हैं। वैश्विक आर्थिक भावना में सुधार के बावजूद 97% अर्थशास्त्रियों ने भू-राजनीतिक संघर्षों को अगले वर्ष की अनिश्चितता का प्रमुख संभावित स्रोत माना।
विश्व आर्थिक मंच (WEF) की सितंबर 2026 Chief Economists’ Outlook के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल अर्थशास्त्रियों ने भारत को कवर किए गए क्षेत्रों में सबसे मजबूत विकास संभावनाओं वाला क्षेत्र माना है। कुल 98% मुख्य अर्थशास्त्रियों को अगले 12 महीनों में भारत में मध्यम या उससे बेहतर आर्थिक वृद्धि की उम्मीद है, जबकि 74% ने मजबूत या बहुत मजबूत वृद्धि का अनुमान लगाया है। मई 2026 में मजबूत/बहुत मजबूत वृद्धि की उम्मीद करने वालों का अनुपात 52% था।
घरेलू मांग बनी भारत की प्रमुख ताकत:
WEF के अनुसार भारत की विकास संभावनाओं को मुख्य रूप से मजबूत घरेलू मांग से समर्थन मिल रहा है। यह वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण resilience factor है। WEF के सितंबर सर्वेक्षण में भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया को क्षेत्रीय विकास संभावनाओं के मामले में सबसे मजबूत आकलन मिला।
भारत बनाम चीन और यूरोप:
भारत की बेहतर होती विकास धारणा के विपरीत चीन की विकास संभावनाओं का आकलन कमजोर हुआ है, जबकि यूरोप का outlook कुछ सुधरने के बावजूद सर्वेक्षण में शामिल क्षेत्रों में सबसे कमजोर बना हुआ है। WEF के अनुसार लगभग एक-तिहाई अर्थशास्त्री चीन में कमजोर वृद्धि की उम्मीद करते हैं, जबकि यूरोप में 61% अर्थशास्त्रियों ने कमजोर या बहुत कमजोर वृद्धि की संभावना जताई। दक्षिण-पूर्व एशिया भी मजबूत विकास संभावनाओं वाले क्षेत्रों में शामिल रहा।
भारत की GDP वृद्धि और संभावित जोखिम:
सितंबर 2026 के WEF आकलन में भारत की 2026-27 GDP वृद्धि का अनुमान 6.7% बताया गया है। हालांकि, भारत की अर्थव्यवस्था के सामने ऊर्जा की ऊंची कीमतें महत्वपूर्ण जोखिम हैं, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक विखंडन (geoeconomic fragmentation) भी बाहरी जोखिम पैदा करते हैं।
वैश्विक आर्थिक भावना में सुधार, लेकिन जोखिम कायम:
WEF के सितंबर सर्वेक्षण में 56% मुख्य अर्थशास्त्रियों ने अगले वर्ष वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के स्थिर रहने या सुधारने की उम्मीद जताई, जबकि मई में केवल 11% ने ऐसा आकलन किया था। इसके बावजूद 97% अर्थशास्त्रियों ने भू-राजनीतिक संघर्षों को अनिश्चितता का संभावित स्रोत माना। WEF ने बढ़ती geoeconomic fragmentation, लागत-ए-जीवन और asset-price corrections जैसे जोखिमों को भी रेखांकित किया है।
UPSC के लिए महत्व:
यह समाचार GS Paper-III – भारतीय अर्थव्यवस्था, आर्थिक वृद्धि, वैश्वीकरण और बाह्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। इससे भारत की domestic demand-led growth, GDP growth, external vulnerabilities, energy security, geopolitical risks, geoeconomic fragmentation और global economic outlook को जोड़ा जा सकता है। परीक्षा के लिए प्रमुख तथ्य याद रखें—WEF Chief Economists’ Outlook September 2026 → भारत: 98% moderate-or-stronger growth expectation → 74% strong/very strong growth → मई में 52% → FY2026-27 growth outlook: 6.7% → प्रमुख strength: domestic demand → प्रमुख risks: energy prices और geopolitical tensions।