विश्व सर्प दिवस (World Snake Day): जैव विविधता संरक्षण एवं मानव–सर्प सह-अस्तित्व का संदेश
विश्व सर्प दिवस प्रत्येक वर्ष 16 जुलाई को साँपों के संरक्षण, उनके पारिस्थितिक महत्व तथा उनके प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। साँप खाद्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और कृषि में हानिकारक कृन्तकों की संख्या नियंत्रित कर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखते हैं। भारत में 300 से अधिक सर्प प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें लगभग 60 विषैली हैं और अधिकांश वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत संरक्षित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने Snakebite Envenoming को Neglected Tropical Disease (NTD) घोषित किया है, जिससे सर्पदंश की रोकथाम और समय पर उपचार का महत्व बढ़ जाता है।
विश्व सर्प दिवस (World Snake Day) प्रत्येक वर्ष 16 जुलाई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य साँपों के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करना, उनके पारिस्थितिक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उनके संरक्षण को प्रोत्साहित करना है। यह दिवस मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलित सह-अस्तित्व (Coexistence) का भी संदेश देता है।
पारिस्थितिकी तंत्र में साँपों का महत्व साँप खाद्य श्रृंखला (Food Chain) एवं खाद्य जाल (Food Web) के महत्वपूर्ण घटक हैं। ये चूहों एवं अन्य कृन्तकों (Rodents) की संख्या नियंत्रित कर कृषि उत्पादन की रक्षा करते हैं तथा पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साँप स्वयं भी कई पक्षियों, शिकारी स्तनधारियों एवं अन्य जीवों के भोजन का स्रोत होते हैं।
भारत में सर्प विविधता
भारत विश्व के सर्वाधिक सर्प विविधता (Snake Diversity) वाले देशों में से एक है, जहाँ लगभग 300 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इनमें से लगभग 60 के आसपास प्रजातियाँ विषैली (Venomous) मानी जाती हैं। भारत में चिकित्सकीय दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषैले साँपों को "बिग फोर (Big Four)" कहा जाता है—
भारतीय कोबरा (Indian Cobra)
कॉमन क्रेट (Common Krait)
रसेल वाइपर (Russell's Viper)
सॉ-स्केल्ड वाइपर (Saw-scaled Viper)
संरक्षण एवं कानूनी प्रावधान
भारत में अधिकांश साँप वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wild Life Protection Act, 1972) के अंतर्गत संरक्षित हैं। इनके अवैध शिकार, व्यापार एवं हत्या पर दंड का प्रावधान है। साँपों का संरक्षण जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता तथा मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
भारत में सर्पदंश की चुनौती
भारत में प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में सर्पदंश (Snakebite) के मामले सामने आते हैं, विशेषकर ग्रामीण एवं कृषि क्षेत्रों में। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने Snakebite Envenoming को Neglected Tropical Disease (NTD) के रूप में मान्यता दी है। समय पर उपचार, एंटी-स्नेक वेनम (ASV) की उपलब्धता, जन-जागरूकता तथा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना इस चुनौती से निपटने के लिए आवश्यक है।
UPSC दृष्टिकोण से महत्व
यह विषय जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र, खाद्य श्रृंखला, मानव–वन्यजीव संघर्ष, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, राष्ट्रीय जैव विविधता संरक्षण तथा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण जैसे विषयों से संबंधित है। प्रारंभिक परीक्षा में बिग फोर विषैले साँप, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, WHO द्वारा मान्यता प्राप्त Neglected Tropical Disease तथा सर्पों के पारिस्थितिक महत्व से जुड़े तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा (GS Paper III) में जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन, पारिस्थितिक संतुलन तथा मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व के संदर्भ में इसका विश्लेषणात्मक महत्व है।
